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जिले भर में सादगी से मनेगी गुरुपूर्णिमा

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गाजीपुर। कोरोना महामारी के असर को देखते हुए जिले भर में गुरुपूर्णिमा का पर्व सादगी से मनाए जाने का निर्णय लिया गया है। इस मौके पर मठो, आश्रमों, गुरुस्थानों पर कार्यक्रमों का आयोजन नहीं होगा और न ही शिष्यों की भीड़ लगेगी। वैसे भी गाजीपुर जिले में धारा 114 लागू है जिसके चलते इस प्रकार के कार्यक्रमों को पहले से ही वर्जित कर दिया गया है। हालांकि मानव जीवन के लिए गुरु पूजा का पर्व सबसे बड़ा पर्व होता है। लेकिन इस बार भक्त अपने गुरुओं के चरण बंदन नहीं कर पाएंगे। इधर जनपद के तमाम मठ मंदिरों पर बड़े-बड़े सूचनापट्ट के साथ ही व्यक्तिगत रूप से शिष्यों को सूचना देकर गुरु पूर्णिमा के पर्व पर गुरुस्थानों पर आने से मना कर दिया गया है। कहा गया कि लोग अपने घरों में गुरुजनों का पूजन करें।
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सिद्धपीठ हथियाराम मठ
स्थानीय क्षेत्र के 650 वर्ष प्राचीन सिद्धपीठ हथियाराम मठ में परंपरागत रूप से मनाई जाने वाली गुरु पूर्णिमा पर्व पर हजारों की भीड़ जुटती है। जहां दिनभर गुरु पूजन के साथ ही भंडारा प्रसाद का कार्यक्रम किया जाता है। इस दौरान देश के कोने-कोने से शिष्य उपस्थित होकर मठ के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी भवानी नंदन यति जी महाराज का दर्शन पूजन कर आशीर्वाद लेते है। इस वर्ष गुरु पूर्णिमा के पर्व पर मठ द्वारा कोई आयोजन नहीं किया जाएगा। सिद्धपीठ के पीठाधीश्वर जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी भवानीनंदन यति जी महाराज ने कहा कि वैश्विक महामारी कोरोना के चलते एकत्रीकरण पर रोक लगा दिया गया है। ऐसे में मेरे द्वारा सिद्ध पीठ में सादगी पूर्वक अपने गुरु के साथ ही सिद्धपीठ के तमाम ब्रह्मलीन संत महात्माओं का पूजन अर्चन किया जाएगा। वहीं शिष्यों को संदेश दे दिया गया है कि वे लोग अपने-अपने घरों में ही रहते हुए गुरु पूजन कर आशीर्वाद ग्रहण करेंगे।
सिद्ध संत पीठ स्थली भुड़कुड़ा मठ
जखनिया क्षेत्र में स्थित सिद्ध संत पीठ स्थली भुड़कुड़ा मठ के महंत शत्रुघ्न दास जी महाराज ने कहा कि गुरु पूर्णिमा के अवसर पर पीठ में स्थित सिद्ध संतों की समाधि पर उनके द्वारा पूजन अर्चन परंपरागत ढंग से किया जाएगा लेकिन शिष्यों का प्रवेश वर्जित रहेगा। बताया कि इस दौरान मठ के कपाट बंद रखे जाएंगे। पूर्वांचल के सभी जनपदों के साथ ही देश के कोने-कोने से जुटने वाले श्रद्धालुओं को इस बार संदेश दे दिया गया है कि गुरु पूर्णिमा के अवसर पर मठ पर कोई यहां उपस्थित नहीं होगा। सभी लोग अपने मन के भीतर व घरों में चित्र लगाकर श्रद्धा पूर्वक गुरुजनों का पूजन अर्चन करेंगे। उन्हें गुरुओं का आशीर्वाद प्राप्त होगा। मन से किया जाने वाला चिंतन भी सक्षम फल देता है।
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श्री गंगा आश्रम बयेपुर देवकली
मानव धर्म के प्रचार प्रसार में लगी संस्था धर्म का प्रचार प्रसार करती है। कुछ भी बनने से पहले मानव बनों का अभियान चलाने वाले बड़ी संख्या में शिष्यों का जमावड़ा बयेपुर देवकली स्थित श्री गंगा आश्रम पर होता है। इस बार जबकि कोरोना के रुप में नामव समाज पर ही संकट छाया हुआ है ऐसे में संत भोलादास जी महाराज ने पहले ही भीड़ न हो इसके लिए इस पर्व को सादगी से ही मनाने का निर्णय ले लिया। इस बार इस आश्रम पर न तो भक्तो की भीड़ आएगी और न ही भंडारे का कार्यक्रम होगा। संत भोलादास जी ने संदेश देते हुए कहा कि भक्तजन अपने गुरु में श्रद्धा और विश्वास रखे। हमेशा मन से भजन मनन करे। गुरु के प्रति श्रद्धा बनी रहेगी तो आर्शिवाद अवश्य प्राप्त होगा। उन्होंने सद्गगुरु की ओर से सभी को आर्शिर्वाद का अधिकारी बताया।
अति प्राचीन मठ पोस्ताघाट
शहर में गंगा के किनारे पोस्ताघाट पर स्थित उदासीन संप्रदाय के इस मठ का अलग ही महत्व है। देश भर में इस मठ के बड़ी संख्या में अनुयाई है। गुरुपूजा पर यहां दूर दराज से बड़ी संख्या में शिष्य अपने गुरु पूजन के लिए आते है लेकिन इस बार यहां भी कार्यक्रम को स्थगित कर दिया गया है। मठ के महंथ बासुदेवानंद जी ने शिष्यों के पहले से ही भीड़ भरे आयोजन से मना कर दिया। कहा कि जीवन में सद्गुरु का बहुत महत्व है। उनके ज्ञान से ही जीवन में सकारात्मकता आती है। कोराना की वजह से इस बार विपरीत परिस्थि तियां चल रही है। सभी शिष्यों को गुरु का आशिर्वाद प्राप्त करने लिए बस उनके मनन की जरूरत है। उन्होंने संदेश दिया है कि इस बार सभी भक्त घर पर ही गुरु पूजन करें।
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