गाजीपुर। ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे के किनारे वन क्षेत्र तैयार होगा। इसके लिए वन विभाग की ओर से मियावाकी पद्धति से 40 हजार पौधे रोपे जाएंगे। इसके लिए एनएचआई ने जंगीपुर बाईपास के पास डेढ़ हेक्टेयर भूमि चिह्नित की है। इसे लेकर एनएचआई सह परियोजना निदेशक श्रीप्रकाश पाठक की ओर से वन विभाग को पत्र भेजा गया है। पत्र में जिक्र किया गया है कि जंगीपुर के पास ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे के बाईं ओर डेढ़ हेक्टेयर भूमि चिह्नित कर ली गई है। यहां अधिक से अधिक संख्या में पौधों का रोपण किया जाए। वन विभाग की ओर से निर्णय लिया गया है कि चिह्नित भूमि पर लगभग 40 हजार पौधों का रोपण मियावाकी पद्धति के जरिए किया जाएगा। वहीं ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे के किनारे पौधरोपण होने से सफर के दौरान लोगों को हरियाली का एहसास होगा। साथ ही पर्यावरण को भी संतुलित करने में सहायता मिलेगी। दिन-प्रतिदिन बढ़ते प्रदूषण के कारण हर कोई व्यापक स्तर पर पौधरोपण की जरूरत महसूस कर रहा है।
ये है मियावाकी पद्धति
मियावाकी पद्धति से देसी पौधों का रोपण करके किसी भी कम जगह को वन क्षेत्र में विकसित किया जाता है। इस पद्धति का उपयोग करने से वन क्षेत्र तेजी से बढ़ता है। इसमें जीव अमृत और गोबर खाद का इस्तेमाल किया जाता है। तकनीक के यह हैं फायदे : 2 फीट चौड़ी और 30 फीट पट्टी में 100 से भी अधिक पौधे रोपे जा सकते हैं। पौधे पास-पास लगने से मौसम की मार का असर नहीं पड़ता और गर्मियों के दिनों में भी पौधे के पत्ते हरे बने रहते हैं। मियावाकी पद्धति के प्रणेता जापानी वनस्पति वैज्ञानिक अकीरा मियावाकी हैं।
ऐसे पौधों का किया जाता है चयन
गाजीपुर। मियावाकी पद्धति में पौधों की तीन प्रजातियों की सूची तैयार की जाती है। पेड़ बनने पर इनकी ऊंचाई अलग-अलग होती है। इसके तहत एक ऊंचाई वाला, दूसरा कम ऊंचाई वाला और तीसरा छायादार पौधा होता है। पौधों का रोपण कुछ दूरी पर किया जाता है। इन सभी को थोड़े-थोड़े अंतराल पर लगाया जाता है।
ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे के किनारे मियावाकी पद्धति से पौधरोपण किया जाएगा। इसको लेकर डेढ़ हेक्टेयर भूमि चिन्हित कर लिया गया है। जल्द ही पौधरोपण का कार्य शुरू किया जाएगा।-विवेक यादव, डीएफओ