मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को कहा कि सरकार अब एक बड़ी कार्ययोजना पर कार्य कर रही है। इसमें जिन परिवारों को कोई रोजगार या सरकारी नौकरी नहीं मिल पाई है, उनकी मैपिंग की जा रही है। अगले पांच वर्ष के अंदर ऐसे हर परिवार के एक सदस्य को रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य है। सीएम पीजी कालेज के संस्थापक राजेश्वर सिंह की प्रतिमा के अनावरण के बाद जनसभा को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि पिछले पांच साल में पांच लाख नौजवानों को सरकारी नौकरी दी गई। एक करोड़ 59 लाख लोगों को योजनाओं के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराया गया। 59 लाख उद्यमियों को स्वत: रोजगार से जोड़ा गया। कहा कि बाबू राजेश्वर सिंह ने शिक्षा के क्षेत्र में अभिनव कार्य किए। सीएम ने कहा कि जनपद में शिक्षा का अलख जगाने वाले बाबू राजेश्वर सिंह ने इलाहाबाद विवि से स्नातक और लॉ की डिग्री ली। उन्होंने 1957 में गाजीपुर डिग्री कॉलेज की स्थापना की, जो आज पीजी कॉलेज के रूप में 10 हजार छात्र-छात्राओं की शिक्षा का केंद्र बना है। संयोग है कि महाविद्यालय पहले गोरखपुर विश्वविद्यालय से संबद्ध था। जब 1957-58 में गोरखपुर विवि की स्थापना हो रही थी तो गोरक्षपीठ ने अपने दो महाविद्यालय दिए थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि गाजीपुर देश का इतिहास बनाने वाला, राक्षसों का समूल नाश करने वाला जनपद रहा है। आर्यावर्त की दो ताकतें जनकपुर और अयोध्या को मिलाने वाला जनपद रहा है।
सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री ने जब गाजीपुर को मेडिकल कॉलेज दिया तो हमने अतीत का सम्मान करते हुए महर्षि विश्वामित्र के नाम पर इसका नामकरण किया। आजमगढ़ में विश्वविद्यालय बनाया गया तो उसे महाराजा सुहेलदेव के नाम पर रखा गया। विरासत के प्रति सम्मान प्रकट करने का यही तो तरीका है। आजादी के अमृत महोत्सव के पंच प्रणों में एक प्रण विरासत का सम्मान करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां की पहचान को धूमिल करने का प्रयास हुआ था। गाजीपुर और आजमगढ़ में बहुत क्षमता थी। बहुत बड़ी विरासत हमारे पास थी। बाबू राजेश्वर प्रसाद सिंह ने शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति की। मिशन मोड में काम किया। बार एसोसिएशन और शिक्षा के क्षेत्र में उनके कार्य उल्लेखनीय हैं। इससे पहले मुख्यमंत्री 12.40 बजे हलीकाप्टर से पहुंचे और मूर्ति अनावरण के बाद 1.22 बजे से 19 मिनट तक जनता को संबोधित किया। इसके बाद करीब 2:25 बजे चले गए।
यूपी में 56 फीसदी कामकाजी लोग
सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने देश को प्रेरित किया है। जीवन और जीविका के साथ देश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू की है। यह महाविद्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति की अभिनव प्रयोग की भूमि बन सकती है। इसमें सैद्धांतिक और तकनीकी ज्ञान से सक्षम युवा देश और दुनिया में पहुंचेंगे। भारत दुुनिया का सबसे युवा राष्ट्र है। जब भारत की बात होती है तो उत्तर प्रदेश सबसे युवा है, जिसमें 56 फीसदी कामकाजी लोग हैं। कहा कि युवाओं को विभिन्न योजानाओं से लाभान्वित किया जा रहा है। अभ्युदय योजना के जरिए अधिकारी तैयार किए जा रहे हैं। जनपद और कमिश्नरेट पर अभ्युदय कोचिंग की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। स्वामी विवेकानंद सक्षम योजना के तहत 15 लाख नौजवानों को टैबलेट और स्मार्टफोन वितरित किया गया। अगले पांच साल में दो करोड़ युवाओं को टैबलेट और स्मार्टफोन दिए जाएंगे।
अठहठा में बनेगा पुल : सांसद
कार्यक्रम के दौरान बलिया सांसद विरेंद्र सिंह ‘मस्त‘, विधान परिषद सदस्य विशाल सिंह ‘चंचल‘ और अपर महाधिवक्ता अजीत प्रताप सिंह ने जनसभा को संबोधित किया। सांसद ने कहा कि पिछले दिनों विकास खंड रेवतीपुर के अठहठा गांव में नाव दुर्घटना से आहत हूं। इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति न हो और लोगों की सुविधा के लिए वहां जल्द पुल का निर्माण कराया जाएगा। उन्होंने प्रशासन से सर्वे कराकर रिपोर्ट मांगी है। एमएलसी ने कहा कि वीरों की धरती की पहचान अपराधियों से हो गई थी। लेकिन अब स्थितियां बदली है। यहां अपराध होने पर बाबा की पुलिस उनको कहां उठा ले जाएगी, यह पता नहीं चलेगा।
मंच से दो पुस्तकों का विचोमन हुआ
मुख्यमंत्री ने मंच से पूर्व आईएएस संजीव सिंह द्वारा लिखित कर्मयोगी राजेश्वर बाबू स्मृतियों के वातायन से और डा. अनिल कुमार सिंह की लिखित पुस्तक का विमोचन किया।
रुद्राक्ष का पौधा लगाया
मुख्यमंत्री ने पीजी कॉलेज परिसर में रुद्राक्ष का पौधा लगाया। उन्होंने गोरक्षपीठ और राजेश्वर बाबू के आत्मीय संबंधों के बारे में बताया।
लाभार्थियों को डेमो चेक, ट्राई साइकिल दी
मुख्यमंत्री ने 45 लाभार्थियों को ट्राई साइकिल, कान की मशीन, स्मार्ट केन और व्हील चेयर प्रदान किया। 14 लाभार्थियों को टैबलेट, चूल्हा, पाइप, गैस सिलिंडर, डेमो चेक, टूल किट आदि दिया।
मंच पर ये भी रहे मौजूद
मंच पर पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष प्रभुनाथ चौहान, जिला पंचायत अध्यक्ष सपना सिंह, नगर पालिका अध्यक्ष सरिता अग्रवाल, पूर्व राज्य मंत्री संगीता बलवंत, पूर्व विधायक अलका राय, सुनीता सिंह, सुभाष पासी, जिलाध्यक्ष भाजपा भानुप्रताप सिंह सहित अन्य उपस्थित रहे।
4.5 क्विंटल की है प्रतिमा
बाबू राजेश्वर सिंह की प्रतिमा कांसे और तांबे से बनी है। यह करीब 4.5 क्विंटल की है। आजमगढ़ के शैलेंद्र कुमार ने इसे बनाया है। इससे पहले उन्होंने बलिया में लगी पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर और वरिष्ठ सपा नेता रामकरन दादा की प्रतिमा भी बनाई थी।
गाजीपुर के मालवीय राजेश्वर सिंह
राजेश्वर प्रसाद सिंह को गाजीपुर का मालवीय कहा जाता है। उन्होंने बीएचयू की तर्ज पर यहां महाविद्यालय की स्थापना की। उनका जन्म वर्ष 1923 में सैदपुर में हुआ था। उस साल प्लेग का प्रकोप होने से सारा परिवार गांव छोड़कर गाजीपुर में आ गया था। जन्म के दिन ही उनके बड़े भाई की मृत्यु हो गई। राजेश्वर सिंह ने परिवार की छोटी-बड़ी जिम्मेदारियों के साथ संघर्ष करते हुए इंटर पास करने के साथ ही इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से बीए और फिर कानून की पढ़ाई की। इसके बाद 1951 में उन्होंने गाजीपुर आकर वकालत शुरू की। साल 1957 में तत्कालीन जिलाधिकारी कुशल पाल सिंह के सहयोग से 22 छात्रों और पांच अध्यापकों के साथ पीजी कॉलेज की स्थापना की थी।