स्वास्थ्य केंद्रों से रिलीव हो चुके कई एमबीबीएस डॉक्टरों को दोबारा वहीं सेवाएं देने के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं।
मातृ मृत्यु दर को कम करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से सेफ बर्थ रिस्पान्स टीम के गठन की तैयारी शुरू कर दी गई है। टीम में एक स्त्री एवं बाल रोग विशेषज्ञ, सर्जन और निश्चेतक चिकित्सक मौजूद रहेंगे। इन्हें हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं का सुरक्षित प्रसव कराने की जिम्मेदारी विभाग की ओर से सौंपी जाएगी। जिले के 14 सीएचसी-पीएचसी और तीन एफआरयू (प्रथम संदर्भन इकाईयों) पर सप्ताह में दो दिन टीम के सदस्य जाएंगे।
जिले में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के चलते सीएचसी-पीएचसी और एफआरयू पर हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं को बेहतर चिकित्सकीय सुविधा नहीं मिल पा रही है। शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाली ऐसी गर्भवती महिलाओं को काल के ग्रास से बचाने के लिए सेफ बर्थ रिस्पान्स टीम (एसबीआरटी) का गठन करने की कवायद विभाग की ओर से शुरू कर दी गई है। प्रसव संबंधी चिकित्सा विशेषज्ञों की यह टीम सप्ताह में दो दिन हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं के लिए ओपीडी का संचालन करने का काम करेगी।
टीम के सदस्य न्यूनतम 30 मरीज देखने के साथ हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं की जांच और सुरक्षित प्रसव की योजना तैयार करने का काम करेंगे। तीनों एफआरयू पर ओटी के संचालन का काम भी टीम की मौजूदगी में किया जाएगा।स्वास्थ्य विभाग ने जिला महिला अस्पताल, सैदपुर और मुहम्मदाबाद सामुदायिक केंद्रों को प्रथम संदर्भन इकाई (एफआरयू) का नाम दिया है।
जिले के प्रत्येक गांवों में आयोजित होने वाली ग्राम्य स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस के द्वारा एएनएम उस गांव की गर्भवती महिलाओं के हीमोग्लोबिन, एल्यूमिन और वजन की जांच करेगी। जांच के दौरान चिन्हित हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं का आंकड़ा तैयार कर उनका कार्ड बनाने के साथ टीम के सदस्यों को अवगत कराने का काम करेंगी।मदर चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम में लोड किए गए गर्भवती महिलाओं के आंकड़ों से हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं की पहचान करने में सहायता ली जाएगी।
जिले के सभी सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की जांच करने के लिए विभाग की ओर से चार एमबीबीएस चिकित्सकों की सप्ताह के प्रत्येक दिन ड्यूटी लगाई जाएगी।