एसपी के मुताबिक सोची समझी रणनीति के तहत उमर अंसारी ने अपनी मां और 50 हजार की ईनामी अफसा अंसारी का फर्जी हस्ताक्षर करते हुए एक याचिका न्यायालय में दाखिल कर दिया। जिसके सम्यक जांचोपरांत फर्जीवाड़ा सामने आया।
न्यायालय को भी भ्रम में रखने का प्रयास करते हुए फर्जीवाड़ा किया गया है। इनके इस कृत्य से न्यायिक शुचिता भी प्रभावित हुई है, जिसपर मुहम्मदाबाद थाने में उमर अंसारी और उनके अधिवक्ता लियाकत अली के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था।
मुहम्मदाबाद में दर्ज कराए गए मुकदमें के मुताबिक 9 जुलाई 2025 को सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) से न्यायालय प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश/ एमपीएमएलए कोर्ट ने आख्या मांगी। 11 जुलाई को संबंधित प्रपत्रों की नकल प्राप्त किए। दाखिल प्रपत्रों के देखने पर प्रथम दृष्टया यह तथ्य सामने आया कि अभियुक्ता अफ्शा अंसारी ने अपने एडवोकेट के माध्यम से दायर की गई याचिका के साथ संलग्न प्रपत्रों में उसके हस्ताक्षर है, लेकिन वह संदिग्ध प्रतीत हो रहे थे।
ऐसे में अभिलेखों से भौतिक रूप से मिलान किया गया तो पता चला कि मेसर्स विकास कंस्ट्रक्शन में अफसा अंसारी 60 प्रतिशत की पार्टनर है। उस पार्टनरशिप डीड में अफ्शा अंसारी के किए गए हस्ताक्षर और दायर की इस याचिका के साथ संलग्न प्रपत्रों से बिल्कुल अलग हैं। चूंकि याचिकाकर्ता के वकील लियाकत अली द्वारा याचिका में यह तथ्य भी अंकित किया गया कि यह याचिकाकर्ता द्वारा याचिका मय संलग्नक अपने पुत्र उमर अंसारी के माध्यम से स्वयं द्वारा हस्ताक्षर करके उमर अंसारी को दिया गया है। जबकि वह खुद एक 50 हजार रुपये की ईमानियां हैैं। ऐसे में वह कभी भी ऐसा नहीं कर सकती हैं, जिसे गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने 3 जुलाई की शाम मुकदमा दर्ज किया।