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हत्याकांड का खुलासा: पत्नी, भाई व प्रेमी ने मिलकर की सुभाष की हत्या

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गाजीपुर। पुलिस के लिए सिरदर्द बने सुभाष हत्याकांड की गुत्थी बुधवार को सुलझ गई। पुलिस ने हत्याकांड का पर्दाफाश करते हुए हत्यारोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया। पत्रकारों से बातचीत में पुलिस अधीक्षक डा. अरविंद चतुर्वेदी ने बताया कि सुुभाष की हत्या गैरों ने नहीं, उसके अपनों ने की है। हत्या में मृतक की पत्नी, उसका सगा छोटा भाई और गांव का एक अन्य व्यक्ति शामिल है। सभी ने एक योजना तैयार की और सुभाष को शराब पिलाने के लिए गांव से बाहर बुलाया और नशे में धुत होने के बाद गड़ासे से वार कर मौत की नींद सुला दी। इसके बाद शव को ठिकाने लगा दिया। घटना को अंजाम दे बड़ी चतुराई से पुलिस को तहरीर दी और ग्राम प्रधान को हत्यारोपी बना दिया। पुलिस उसी दिन से ग्राम प्रधान को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही थी।
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एसपी डा. अरविंद चतुर्वेदी ने बताया कि मोबाइल और सर्विलांस के जरिए हत्यारोपियों तक पुलिस पहुंच सकी। मृतक के छोटे भाई दिनेश राम ने पुलिस को बताया कि मेरा बड़ा भाई सुभाष राम बहुत अधिक शराब पीता था। इस कारण हमारी भाभी उसे पसंद नहीं करती थी और उसका संबंध हमसे हो गया था। इसे कुछ दिन पहले बड़े भाई ने देख लिया था। बाद में हमारी भाभी का संबंध गांव के ही रामजीवन उर्फ टेंपू से भी हो गया था। जिसे हमने देख लिया था। हम लोगों के अवैध संबंध में मेरा बड़ा भाई रोड़ा बन रहा था। इससे उसे रास्ते से हटाने की योजना हम लोगों ने अंदर ही अंदर तैयार कर ली। दिनेश ने यह भी बताया कि गांव के ही फेंकू से हमारा जमीनी विवाद चलता था। जिसमें वर्तमान ग्राम प्रधान उनकी मदद कर रहा था। इस कारण हम प्रधान से रंजिश रखते थे तथा बदला लेना चाहते थे। इसके लिए हमने अपनी भाभी को विश्वास में लेकर प्लान बनाया कि भाई की हत्या कर दें, जिसमें प्रधान को नामजद कर देंगे और प्रधान जेल चला जाएगा तो हम लोगों को जमीन भी मिल जाएगी और तुम रामजीवन के साथ बिना किसी परेशानी के आराम से रहोगी। इस प्लान को मैंने और मेरी भाभी ने रामजीवन को बताया। पहले तो उसने इंकार किया, लेकिन बाद में भाभी के कहने पर तैयार हो गया। दो नवंबर की देर शाम गांव के बाहर मैने एवं रामजीवन ने सुभाष को शराब पीने के लिए बुलाया। मैंने झोले में शराब और गड़ासा रखा था। उस दिन सुभाष को जमकर पिलाया गया, जिससे वह नशे में धुत हो मेढ़ पर सो गया। इसके बाद मैंने रामजीवन को गड़ासा थमा दिया और सुभाष का दोनों हाथ पकड़ लिया। रामजीवन ने गले पर तीन-चार वार कर सुभाष की हत्या कर दी। वारदात के बाद हम लोगों के गड़ासा को कुआ में फेंक दिया और भाभी को सुभाष का काम तमाम होने की जानकारी देने के बाद उसका मोबाइल उसे सौंप दिया।
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