सूची से नाम गायब, राशन के लिए भटक रहे कार्डधारक
चित्तावन पट्टी गांव में पात्रों को नहीं मिल रहा राशन
गांव में 513 कार्डधारक, लेकिन सभी को नहीं मिलता है राशन
अमर उजाला ब्यूरो
जमानिया। जिले के गांव-गांव में राशन के लिए लोग भटक रहे हैं। आधार कार्ड से राशन कार्ड को जोड़ने के नाम पर लोगों को राशन से वंचित रखा जा रहा है। उनका नाम सूची से बाहर कर दिया जा रहा है। इन दिनों नाम हटाने और जोड़ने का खेल चहुंओर चल रहा है। हम एक नजर स्थानीय विकास खंड के चित्तावन पट्टी गांव में डालें तो यहां भी कुछ ऐसी ही समस्या से लोग जूझ रहे हैं। दर्जनों लोगों का नाम सूची से गायब हैं। राशन के लिए कोटेदार के यहां पहुंचे लोग मायूस लौट रहे हैं। वर्तमान में इलेक्ट्रानिक मशीन के प्रयोग के बाद भी गरीबों को राशन समय से नहीं मिल रहा है। विभाग राशन की कालाबाजारी और धन उगाही का खेल खेल रहा है। आलम यह है कि विभागीय अफसरों और जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत से अंत्योदय कार्ड तक बदल दिए जा रहे हैं। इतना ही नहीं, पात्र गृहस्थी के कार्डधारकों के राशन में व्यापक स्तर पर कटौती की जा रही है। सब कुछ जानते हुए भी संबंधित विभाग के अधिकारी अंजान बने हुए हैं।
जमानिया क्षेत्र के चित्तावनपट्टी गांव में अशोक यादव कोटेदार हैं। यहां पात्र गृहस्थी के कुल 499 कार्ड के माध्यम से 2040 लोग लाभान्वित हो रहे हैं। इसी क्रम में अत्योदय के 14 कार्ड से 35 लाभार्थियों को इसका लाभ मिल रहा है। देखा जाए तो गांव में कुल 513 राशन कार्ड हैं। इससे 2075 लोग लाभान्वित हो रहे हैं। जबकि गांव कि आबादी करीब 4800 है। गांव के विजयी विकलांग संजीता देवी, विकलांग छठ्ठु गोंड, सनोज कुमार बिंद, सीमा देवी, शिवशंकर राय, राम कृपाल, बालेश्वर बिंद, रामदुलार आदि का कहना है कि गांव में बिना खुली बैठक किए ही लोगों के नाम राशनकार्ड से काटने और जोड़ने का खेल चल रहा है। इतना ही नहीं, नाम काटने की वजह आधार से कार्ड का लिंक न होना बताया जा रहा है। जबकि ऑनलाइन कराते वक्त पात्र व्यक्ति के आधार कार्ड नंबर को भी शामिल किया जाता है और आधार की फिडिंग भी उसी समय हो जाती है। क्षेत्र की भोली भाली जनता को आपूर्ति विभाग द्वारा बेवकूफ बनाकर अवैध धन उगाही की जा रही है। कार्यालय में मौजूद प्राइवेट कर्मचारियों को आगे कर पात्रों से धन उगाही तक की जा रही है। इसके साथ ही गांव के श्ीातल पाति देवी, जवाहीर बिंद, रोहित बिंद, रघुबर आदि का अंत्योदय से भी नाम काट दिया गया है। गांव में बिना खुली बैठक दिखाकर अंत्योदय कार्ड बदल दिया गया है। पात्र गृहस्थी राशन कार्ड में भी व्यापक स्तर पर खेल किया जा रहा है। अपने खास लोगों का यूनिट बढ़ा दिया जा रहा है जबकि वास्तविक गरीब को एक-दो यूनिट का राशन दिया जा रहा है। शिकायत के बाद भी संबंधित अधिकारी हीलाहवाली करते हैं। उपजिलाधिकारी सत्यप्रिय सिंह ने कहा कि गरीबों के राशन कार्ड में अगर किसी तरह की अनियमितता बरती जा रही है, तो निश्चित रूप से संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। कहा की पहले राशन कार्ड को आधार से लिंक करने के लिए लोगों के नाम काटे गए थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है, जहां ऐसी समस्या हो गांव में खुली बैठक कर नाम जुड़वाया जा सकता है।
दो महीने के भीतर दो बार नाम काट दिया गया है। राशन लेने जाने पर पता चल रहा है कि सूची में नाम नहीं है। जबकि नाम कटने की स्थिति में दो बार ऑनलाइन कर आधार से लिंक कराया गया है। लेकिन बार-बार राशन कार्ड की सूची से नाम गायब रहने से राशन तक नहीं मिल पा रहा है। ऐसा गरीबों को परेशान करने के लिए किया जा रहा है। - बालेश्वर बिंद
सरकार की मंशा है कि प्रत्येक गरीब, दिव्यांग और लाचार तक सरकारी सुविधा पहुंचाई जाए। लेकिन अफसरों और कर्मचारियों की मनमानी के कारण सरकार की योजनाएं रास्ते में ही दम तोड़ दे रही हैं। मैं 70 प्रतिशत विकलांग हूं। मेरा तीन बार से अधिक नाम कट चुका है। बार- बार कार्यालय में जाकर नाम जोड़वाता हूं, लेकिन किसी कारण मेरा नाम काट दिया जाता है। - संजीता बिंद
कोटेदार बार-बार सूची में नाम न होने की बात कहकर वापस कर देता है। गांव में खुली बैठक किए बिना ही मनमाने ढंग से नाम काटा और जोड़ा जा रहा है। जिला प्रशासन और आपूर्ति विभाग इस समस्या से अनजान नहीं है, लेकिन गरीबों को न्याय नहीं मिल रहा है। लोग राशन के लिए भटक रहे हैं। - राम दुलार
दो बार बिना किसी सूचना अथवा खुली बैठक कराए ही सूची से नाम काट दिया गया है। जबकि राशन कार्ड में मेरा आधार लिंक है। लेकिन गरीबों का शोषण करने लिए ऐसा किया जा रहा है। राशन में बड़े पैमाने पर खेल हो रहा है। गुरबत में जीने वालों की आर्थिक क्षति हो रही है। - देवंती देवी
वर्तमान समय में किसी का नाम नहीं कटा है। आधार न जुड़े होने की वजह से कुछ नाम जरूर काटे गए थे। कार्डधारकों से अनुरोध है कि वह अपना आधार राशन कार्ड से लिंक करा लें। यदि किसी प्रकार की समस्या है तो ग्राम में खुली बैठक कराकर विकास खंड के माध्यम से उसे उपलब्ध कराकर नाम जोड़वा सकते हैं। - मनोज कुमार सिंह, आपूर्ति निरीक्षक