गाजीपुर। शहर के हरिशंकरी स्थित राम चबूतरा पर रामलीला अब लगातार रोचक होती जा रही है। शनिवार को श्रीराम राजतिलक की तैयारी, मंथरा कैकेयी संवाद, कोप भवन, दशरथ कैकेयी संवाद, तथा राम द्वारा विदाई मांगने से संबंधित लीला का मंचन किया गया। इधर, कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में भी रामलीला का शुभारंभ हो गया है। लगातार बरसात के चलते कई स्थानों पर रामलीला के मंचन की औपचारिकता पूरा की गई।
शहर के हरिशंकरी की रामलीला के प्रसंग में राजा दशरथ के संवाद से शुरू होती है। वह अपनी अवस्था का ध्यान देते हुए राम को राजगद्दी सौंप देने की बात करते हैं। वह इस प्रस्ताव को कुलगुरु वशिष्ठ के सामने रखते हैं। वशिष्ठ भी इसमें सहमति जताते हुए राम के राजतिलक की आज्ञा दे देते हैं। इसकी जानकारी मिलने पर अयोध्या में खुशी की लहर छा जाती है। दशरथ अपने मंत्री सुमंत को राजतिलक की तैयारी कराने और पूरी अयोध्या नगरी को ध्वज पताकाओं से आकर्षित सजवा देने की आज्ञा देते हैं। अगले प्रसंग में मंथरा और कैकयी के संवाद को भी कलाकारों ने बेहतरीन ढंग से प्रस्तुत किया। दासी मंथरा कैकेयी के कक्ष में जाकर राम के राजतिलक से संबंधित सारी बातों को बता देती है। उन्हें बरगलाते हुए कोप भवन में जाने की सलाह देती है। वह ऐसा ही करती है। जानकारी पाकर राजा दशरथ कैकयी को मनाने कोप भवन जाते हैं। रानी कैकयी दशरथ के पुराने दो वचन याद दिलाते हुए कहती हैं कि वह दो बचन मांगना चाहती हैं। कैकयी वचन के रुप में जो दो वरदान मांगती है उसे सुनकर राजा दशरथ के होश उड़ जाते हैं। कैकेयी पहले वरदान मेें अपने पुत्र भरत को अयोध्या का राज और दूसरे वरदान में राम को 14 वर्ष के लिए तपस्वी के वेष में वनवास मांगती हैं। इतना सुनते ही महाराज दशरथ मूर्छित होकर जमीन पर गिर पड़ते हैं। इसके बाद लीला आगे बढ़ती जाती है। अगले प्रसंग में भगवान राम, लखन और सीता के साथ तपस्वी के वेष में वन गमन के लिए दशरथ से आज्ञा मांगने आते हैं। इधर, अयोध्या के लोग भी राम के साथ जाने को तैयार हो जाते हैं। लीला को देखकर दर्शकों की आंखों से अश्रु धारा निकल गई और श्रीराम के जयकारे से लीला स्थल गुंजायमान हो गया। इस मौके पर अभय अग्रवाल, योगेश कुमार वर्मा, रामजी पांडेय, श्रवण कुमार गुप्ता, राजकुमार शर्मा, विजय मोदनवाल, राम सिंह यादव, कृष्ण बिहारी त्रिवेदी, कुश कुमार, सुधीर अग्रवाल, मनोज तिवारी आदि उपस्थित थे।