गाजीपुर। बाढ़ की दुश्वारियां झेल रहे लोग अब बारिश से दोहरी मार झेलने को तैयार रहे। पिछले कुछ दिनों से गंगा एवं उसकी सहायक नदियों में घटाव जारी है। अब भी कई गांवों के गली-मोहल्ले तालाब जैसे नजर आ रहे हैं। लोग घरों में ही कैद हैं। गुरुवार को गंगा नदी घटते क्रम में 63.360 मीटर पर पहुंच गई थी। एक सेंटीमीटर प्रतिघंटे घटाव का क्रम जारी है। गुरुवार को सुबह से बरसात होती रही। विभिन्न गांवों में बाढ़ पीड़ित घरों में कैद रहे। अभी भी गंगा नदी खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं। मौसम परिवर्तन और रूक-रूक कर बारिश होने की वजह से बाढ़ प्रभावित इलाके से लोग बाहर तक नहीं निकल सके। बारिश ने गांवोंका जनजीवन अस्त- व्यस्त कर दिया है। अभी भी नगर के निचले हिस्से और गांवों में बरसाती पानी जमा है और लोग घरों से नहीं निकल पा रहे हैं।
गंगा में आई बाढ़ के कारण नगर से लेकर गांवों तक पानी ही पानी दिखाई दे रहा है। सुबह से लगातार बारिश की वजह से सड़कों से लेकर गली मोहल्लों में जलजमाव हो गया है। बाढ़ का पानी उतरने से लोग जहां राहत महसूस कर रहे थे, वहीं बारिश ने सड़कों को फिर से जलमग्न कर दिया है। इससे लोगों को आवाजाही में भी खासी दिक्कतें झेलनी पड़ रही है। कई घंटे सेलगातार हो रही बारिश ने जनपद के लोगों की परेशानियां बढ़ा दी है।बाढ़ इलाके में खाली जगहों पर एक बार फिर दरिया बह रहा है। जबकि अभी भी दर्जनों गांव जलमग्न हैं। कुछ जगह पानी घरों में भी घुसा है। बरसात की वजह से शहर में भी जलभराव हो गया है। सड़कें पानी से भरी हैं। आम तौर पर शांत रहने वाले गांव भी दर्द से कराह रहे हैं। जमानिया तहसील के दर्जनभर से अधिक गांवों में अब भी हालात जस के तस हैं। यही हाल रेवतीपुर के आधा दर्जन से अधिक गांवों का है। अभी तक न तो मार्ग चलने लायक हुए हैं और न ही गांवों से पानी हटा है। बच्चे, बूढ़े, महिलाएं और बुजुर्ग सभी घरों में कैद है। कुछ पलायन कर चुके हैं, तो कुछ शरणालयों में जगह लिए हुए हैं।
बाढ़: राहत कार्य में देरी से पनप रहा आक्रोश
गाजीपुर। बाढ़ की विभीषिका झेल रहे पीड़ितों के सब्र का बांध अब टूटने लगा है। प्रशासनिक स्तर से राहत कार्य में देरी से ज्यादातर इलाकों में आक्रोश पनप रहा है। बाढ़ के कहर के बीच लगातार रूक-रूक कर हो रही बारिश ने बाढ़ पीड़ितों के दर्द को और भी बढ़ा दिया है। बाढ़ पीड़ितों का हाल जानने पहुंचे लोगों को भी बाढ़ पीड़ितों के आक्रोश का सामना करना पड़ रहा है।