गाजीपुर। अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम दुर्गेश की अदालत ने करंडा थाने के वरिया गांव में हुए आपराधिक मानव वध के मामले में पांच अभियुक्तों को 10 -10 वर्ष के सश्रम कारावास और एक लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक सुरेश सिंह यादव की बहन की शादी हरिनाथ सिंह यादव पुत्र बुध राम सिंह यादव निवासी बरिया थाना करंडा के साथ हुई थी। उसके जीजा कंचनपुर में मकान बनाए थे। 21 जुलाई 2012 को सुरेश अपनी बहन के यहां तीज लेकर गया था और वहीं रुक गया। उसे जानकारी हुई कि चौचकपुर के सियाराम और उनके लड़कों से उसके भांजा पवन कुमार यादव और पंकज यादव से कहासुनी हुई थी। इसी को लेकर 22 जुलाई 2012 को सुबह पिंटू उर्फ जाफर, अश्वनी कुमार उर्फ गोलू, तुलसी उर्फ तुली, मुंशी राम पुत्रगण सियाराम और सियाराम पुत्र भरत हाथ में लाठी -डंडे और तमंचा लेकर उसके जीजा के घर पहुंच गए और गालियां देने लगे। पिंटू के ललकारने पर सभी लोग मिलकर पंकज यादव और पवन कुमार यादव को बुरी तरह से मारापीटा और घायल कर दिया था। घायलों को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां से पवन को वाराणसी के लिए डाक्टरों ने रेफर कर दिया। इलाज के दौरान पवन की मौत हो गई। तहरीर के आधार पर उपरोक्त लोगों के विरुद्ध 304 भादवि के अंतर्गत मुकदमा पंजीकृत किया गया था। न्यायालय में विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से साक्ष्य प्रस्तुत करने के बाद वादी पक्ष और बचाव पक्ष के तर्कों को सुनकर अदालत ने पांचों अभियुक्तों को धारा 304 /149 भादवि के अंतर्गत दोषी करार देते हुए दस-दस साल के कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने अर्थदंड की राशि से आधी राशि मृतक की माता लीला उर्फ लीलावती देवी को देने का आदेश दिया है।