सैदपुर एमआरएफ सेंटर में लगा कूड़े का पहाड़। संवाद
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गाजीपुर। जनपद के चार नगर पंचायतों में 1.30 करोड़ से चार एमआरएफ (मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी) सेंटर का निर्माण हुआ है। इसके बाद भी यहां कूड़े का निस्तारण नहीं होता है। कहीं खुले में तो कहीं एमआरएफ सेंटर में कूड़ा डंप पड़ा है।
इससे पर्यावरण को भी नुकसान पहुंच रहा है। सादात, सैदपुर, जंगीपुर और दिलदारनगर पंचायतों से प्रतिदिन करीब 200 क्विंटल से ज्यादा कूड़ा निकलता है। नगरीय निकायों को साफ-सुथरा रखने के लिए शासन के निर्देश पर एमआरएफ सेंटर बनाए गए हैं। जमीनी सच्चाई यह है कि जंगीपुर, सैदपुर, दिलदारनगर व सादात नगर पंचायत के एमआरएफ सेंटरों में कूड़ों का निस्तारण नहीं होता है। कुछ जगहों पर सड़क किनारे खुले में कूड़ों को डंप किया जाता है, जो एनजीटी के गाइड लाइन का उल्लंघन है। सड़क किनारे डंप किया जाता है कूड़ा : जंगीपुर नगर पंचायत से छह किलोमीटर दूर मनारपुर में एमआरएफ सेंटर का निर्माण 2022 में 20 लाख से हुआ था। 2024 में 14 लाख की लागत से इसका मशीनीकरण किया गया। प्रतिदिन करीब 40 क्विंटल कूड़ा निकलता है। एमआरएफ सेंटर में कूड़े का निस्तारण करने के बजाए थाने के पास सड़क किनारे डंप कर दिया जाता है।
सैदपुर नगर पंचायत से प्रतिदिन करीब 50 क्विंटल कूड़ा निकलता है। करीब तीन किलोमीटर दूर स्थित इस्माइलपुर में वर्ष 2020 में 33 लाख से एमआरएफ सेंटर का निर्माण हुआ। एमआरएम सेंटर में केवल कूड़े को डंप किया जाता है। दिलदारनगर नगर पंचायत से प्रतिदिन करीब 80 क्विंटल कूड़ा कूड़ा निकलता है। नगर पंचायत में 22 हजार की आबादी रहती है। वर्ष 2019-20 में रक्सहा के पास 33 लाख 68 हजार की लागत से एमआरएफ सेंटर का निर्माण हुआ। लेकिन, ट्रांसफार्मर नहीं लगने के कारण यहां केवल कूड़े को डंप किया जाता है। सादात नगर पंचायत से करीब 30 क्विंटल कूड़ा निकलता है। तीन किलोमीटर दूर शिकारपुर में वर्ष 2016 में एमआरएफ सेंटर बनाया गया है, लेकिन मशीनीकरण नहीं किया गया है।