गंगा का जलस्तर 2 सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से घट रहा है। बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों की दुश्वारियां कम नहीं हो रही हैं। बाढ़ के पानी में डूबा परवल अब सड़ने लगा है। दुर्गंध से आसपास के लोगों का जीना दुश्वार हो गया है। बृहस्पतिवार को गंगा का जलस्तर 61.760 मीटर दर्ज किया गया। 23 जुलाई को गंगा का जलस्तर 1 सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से घट रहा था। गंगा का जलस्तर 62.100 मीटर था। गंगा का पानी कम होने से चीतनाथ, कलक्टर घाट, ददरीघाट की सीढ़ी नजर आने लगी है। भांवरकोल क्षेत्र के मुबारकपुर मौजा से गहमर सिवान तक कटान के कारण 12 बिस्वा कृषि योग्य भूमि गंगा में समा गई। रेवतीपुर क्षेत्र के हसनपुरा, वीरऊपुर, नसीरपुर आदि गांव कटान से प्रभावित है। हसनपुरा निवासी नीतीश कुमार राम ने बताया कि बाढ़ के पानी में डूबा परवल सड़ गया है। दुर्गंध से सांस लेना दूभर हो गया है। नसीरपुर निवासी जितेंद्र चौधरी ने बताया कि दुर्गंध के कारण काफी दिक्कत हो रही है। वीरऊपुर निवासी अशोक राजभर ने बताया कि परवल सड़ने से उठने वाली दुर्गंध को लेकर प्रशासन को पहल करनी चाहिए। लेकिन, तहसील प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। वीरऊपुर निवासी मानसिंह यादव ने बताया कि ग्रामीणों की सहूलियत के लिए प्रशासन तत्पर नहीं है।
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बाढ़ से जुड़े आंकड़े
गंगा के बाढ़ से जलमग्न खेत - 270 बीघा
प्रभावित किसान - 360
गोमती से जलमग्न खेत - 50 बीघा
प्रभावित किसान - 50
अब तक कटान में समाई भूमि - 9 बीघा
गंगा के बाढ़ से प्रभावित गांव - हसनपुरा, नसीरपुर, वीरऊपुर, पटना, शादी-भादी, चकेरी, फुलवारी, फुलवारी कला, औड़िहार
गोमती से प्रभावित गांव - गौरी, गौरहट, तेतारपुर आदि।