फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ghazipur News: चार घाटाें की सीढि़यां चढ़ने लगी गंगा, पटना में खेत डूबे, रास्ता बंद

विज्ञापन
हसनपुरा गांव जाने वाली सड़क पर फैले बाढ़ के पानी से होकर निकलते ग्रामीण। संवाद
विज्ञापन
गाजीपुर। गंगा में बृहस्पतिवार को भी बढ़ाव जारी रहा। हालांकि बढ़ाव के रफ्तार में कमी दर्ज की गई। लेकिन इससे खतरा अभी टला नहीं है। यही कारण है कि तटवर्ती बेचैन दिखाई दे रहे हैं। शहर में चार से अधिक गंगा घाटों की एक-एक सीढ़ियों पर पानी चढ़ने का क्रम शुरू हो गया है। आपदा विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, शाम छह बजे गंगा का जलस्तर 61.490 मीटर दर्ज किया गया। प्रति घंटे एक सेमी की रफ्तार से गंगा में बढ़ाव जारी है। वहीं जनपद के पटना व रेवतीपुर क्षेत्र के निचले इलाकों को मिलाकर 90 बीघा खेत में पानी पसर चुका है।
विज्ञापन


सुबह 11 बजे गंगा का जलस्तर 61.420 मीटर दर्ज किया गया। उस समय गंगा का जलस्तर तीन घंटे में दो सेमी की रफ्तार से बढ़ रहा था। शहर के ददरीघाट, चीतनाथ, कलक्टर घाट, रामघाट आदि गंगा घाटों की सीढ़ियों पर पानी पसरने लगा है। राहत की बात यह रही कि पत्थर घाट के पास हो रही कटान 24 घंटे बाद थम गई। इसके कारण पत्थर घाट के आसपास जिन किसानों की खेत हैं, उन्होंने राहत की सांस ली। बीते 19 अगस्त को शाम सात बजे गंगा का जलस्तर 12 घंटे में चार सेमी की रफ्तार से बढ़ रहा था। 60 बीघा खेत सैदपुर तहसील के पटना इलाके में और सेवराई तहसील क्षेत्र के निचले इलाकों में 30 बीघा खेत में पानी पसर चुका है।

खेतों में पानी, रास्ता बंद

औड़िहार। पटना जनपद के सबसे निचले इलाके में शामिल है। यहां 19 अगस्त को ही गंगा ने तबाही की शुरुआत कर दी थी। पटना में गंगा के किनारे 60 बीघा में चरी के साथ ही नेनुआ, करेला, भिंडी, लौकी, परवल की सब्जियों में पानी पसरा हुआ है। यह लगातार बढ़ता जा रहा है। इसके कारण किसान हताश नजर आ रहे हैं। गोमती नदी की तरफ जाने वाला रास्ता गंगा के पानी से पूरी तरह बंद हो चुका है। लोगों का अपने खेतों की तरफ पहुंचना मुश्किल हो गया है। हथौड़ा, औड़िहार, शादीभादी, फुलवारी कला, फुलवारी खुर्द, देवचंदपुर आदि गांव में भी किनारे के क्षेत्र की खेती डूबने के कगार पर पहुंच चुकी है। करीब 125 किसान इससे प्रभावित नजर आ रहे हैं। किसान सुरेश निषाद, प्रदुमन निषाद, बृजेश नागर, मनीष निषाद, गोविंद निषाद, अर्जुन निषाद, विनोद निषाद, हंसराज निषाद, प्रकाश निषाद, कुंवर राजभर आदि ने बताया कि गंगा का जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा, तो तबाही बड़े पैमाने पर होगी। संवाद
विज्ञापन


हसनपुरा मार्ग पर चढ़ा बाढ़ का पानी

रेवतीपुर में गंगा के जलस्तर में लगातार बढ़ाव के कारण क्षेत्र के नसीरपुर, हसनपुरा, वीरऊपुर और नगदिलपुर गांवों के खेतों में बाढ़ का पानी फैलने लगा है। खेतों में पानी पहुंचने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। वहीं गहमर-कामाख्या धाम मार्ग से सटे हसनपुरा जाने वाली सड़क पर भी बाढ़ का पानी चढ़ गया है, जिससे आवागमन प्रभावित होने लगा है। बाढ़ के पानी को खेतों में बढ़ता देख किसान अपनी परवल की फसल को जल्द से जल्द तोड़कर सुरक्षित करने में जुट गए हैं। करीब 30 बीघा खेत में पानी फैला हुआ है। एसडीएम सेवराई गजराज यादव और सीओ जमानियां अंकित तिवारी ने हसनपुरा और दुल्लहपुर के पंचायत भवन परिसर में ग्रामीणों के साथ चौपाल लगाकर बाढ़ की स्थिति की जानकारी ली।

जनपद में बाढ़ की स्थिति -

वर्ष 2021 में बाढ़ का उच्च जलस्तर 64.680 मीटर

वर्ष 2022 में बाढ़ का उच्च जलस्तर 64.390 मीटर

वर्ष 2023 में बाढ़ का उच्च जलस्तर 61.700 मीटर

वर्ष 2019 में बाढ़ का उच्च जलस्तर 64.530 मीटर

बाढ़ की स्थिति का मापदंड -

सामान्य जलस्तर 59.906 मीटर

चेतावनी बिंदु 62.100 मीटर

खतरा बिंदु 63.105 मीटर

उच्च स्तर 65.220 मीटर

बाढ़ से निपटने को लेकर प्रशासन का दावा -

बाढ़ चौकी - 152

बाढ़ शरणालय - 46

कुल नाव - 229

आपदा मित्र - 22

नाविक - 237

गोताखोर - 37

2025 में बाढ़ से प्रभावित हुए थे 166 गांव

जनपद बाढ़ग्रस्त जिले के श्रेणी में आता है। वर्ष 2025 में बाढ़ के कारण जनपद के 166 गांव प्रभावित हुए थे। धान, बाजरा, मिर्चा व केला की फसलों को सर्वाधिक नुकसान पहुंचा था। 3741.42 हेक्टेयर फसल बाढ़ के पानी से बर्बाद हो गया था। इसके कारण 18922 किसानों को मुआवजा दिया गया था। 2025 में गंगा का उच्च जलस्तर 64.690 मीटर दर्ज किया गया था। साथ ही सदर तहसील क्षेत्र में तीन रिहायशी झोपड़ियां बाढ़ से क्षतिग्रस्त हो गई थी। जिले में बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में पांच तहसीलें आती हैं। इनमें सदर, सैदपुर, जमानिया, मुहम्मदाबाद व सेवराई शामिल हैं।

चेतावनी बिंदु से केवल 0.6 मीटर नीचे गंगा

गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु 62.100 मीटर से केवल 0.6 मीटर नीचे 61.490 मीटर पर बह रही है। अगर गंगा में बढ़ाव जारी रहा, तो जल्द ही गंगा का पानी चेतावनी बिंदु को स्पर्श कर लेगा। यह एक तरह से जिले के लिए खतरे की घंटी है।

गंगा के बढ़ाव को देखते हुए विभाग की ओर से तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। लोग अफवाहों से बचें और किसी भी स्थिति में घबराने की जरूरत नहीं है। - अशोक राय, आपदा विशेषज्ञ

हसनपुरा गांव जाने वाली सड़क पर फैले बाढ़ के पानी से होकर निकलते ग्रामीण। संवाद

हसनपुरा गांव जाने वाली सड़क पर फैले बाढ़ के पानी से होकर निकलते ग्रामीण। संवाद

हसनपुरा गांव जाने वाली सड़क पर फैले बाढ़ के पानी से होकर निकलते ग्रामीण। संवाद

हसनपुरा गांव जाने वाली सड़क पर फैले बाढ़ के पानी से होकर निकलते ग्रामीण। संवाद

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें