गाजीपुर। उत्तराखंड में बादल फटने तथा इधर हुई मूसलधार बारिश के बाद से गंगा के जलस्तर में गुरुवार को भी बढ़ाव जारी रहा। पिछले दो दिनों से दो सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से गंगा का जलस्तर बढ़ रहा थो जो आज सुबह आठ बजे के बाद से एक सेमी प्रति घंटा हो गया। अनुमान है कि यह जलस्तर अभी और बढ़ सकता है। अनुमान लगाया जा रहा है कि अगर मूसलधार बारिश हुई तो यहां भी गंगा रौद्र रूप धारण कर सकती हैं। इधर गंगा में बढ़ाव से तटवर्ती क्षेत्र के लोगों की धुकधुकी बढ़ गई है। लोग अपने सामान समेटने लगे हैं तथा पलायन के मूड में आ गए हैं। जिले में गंगा सहित छोटी-बड़ी नौ नदियां गुजरती हैं। जिले के पांच तहसीलों का अधिकांश भू-भाग गंगा से घिरा हुआ है। सैकड़ों गांव गंगा किनारे ही आबाद हैं। जहां के लोगों के लिए गंगा ही आजीविका का साधन है लेकिन बरसात शुरू होने पर गंगा के किनारे रहने वाले लोगों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगता है। इधर, तीन दिन से गंगा के जलस्तर में लगातार बढ़ाव हो रहा है।
गुरुवार की शाम चार बजे गंगा का जलस्तर 56.870 मीटर पर पहुंच गया था। यहां खतरे का निशान 65.105 मीटर है। हालांकि गंगा अभी लाल निशान से काफी नीचे है फिर भी तटवर्ती क्षेत्र के लोगों की चिंता बढ़ गई है। शहर के ददरीघाट में भी पानी ऊपर तक आ गया है। सीढ़ियां डूब गई हैं। यहां लोग नजारा देखने के लिए पहुंच रहे हैं। इसी प्रकार जिले की अन्य नदियों में भी तेजी आई है। बेसो, टौंस नदियों में भी बढ़ाव की खबर मिली है। सिधागर घाट में टौंस की वजह से कई गांव पानी से घिर जाते हैं। केंद्रीय जल आयोग के स्थल प्रभारी हसनैन ने बताया कि फिलहाल एक सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से गंगा का जलस्तर बढ़ रहा है। पहले से रफ्तार में कमी आई है। खतरे के निशान से गंगा अभी काफी दूर है। अभी डरने की कोई बात नहीं है।
गाजीपुर। गंगा नदी कई बार जिले में तबाही मचा चुकी है। पिछले वर्ष 2018 में भी जिले में बाढ़ का मंजर देखने को मिला था। गंगा खतरे का निशान पारकर करीब 75 सेमी ऊपर बह रही थी। इसी प्रकार, 31 अगस्त 2013 की सुबह नौ बजे गंगा खतरे के निशान 63.105 मीटर को पार कर गई थीं। सुबह नौ बजे वह 63.130 मीटर पर बह रही थी। इसी प्रकार, सात सितंबर 2006 को 11 बजे गंगा ने खतरे के निशान को पार किया था। उस समय बाढ़ का व्यापक असर तीन दिनों तक बना हुआ था। जुलाई 2005 में भी गंगा में बाढ़ आई थी। उस समय गंगा का पानी जल्द ही घटने लगा था। 10 सितंबर 2003 को भी गंगा खतरे के निशान को लांघ गई थी। 14 सितंबर 2003 को गंगा 64.750 मीटर पर पहुंची थी। बाद में उनके तेवर ढीले पड़े तब तक जिले में काफी तबाही मच चुकी थी।