गाजीपुर। महज 16 घंटों बाद गंगा फिर उफान पर आ गई है। डेढ़ सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से घट रही गंगा के जलस्तर में शुक्रवार को सुबह एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की वृद्धि शुरू हो गई। इससे रेवतीपुर क्षेत्र के तीन गांवों नसीरपुर, विरऊपुर और हसनपुरा के मुख्य मार्ग पूरी तरह जलमग्न हो गए। सड़कों पर छह फीट तक पानी एकत्र हो जाने से सड़क पर आवागमन पूरी तरह बंद हो गया। दूसरी ओर जिले में 100 बीघा सब्जी व चरी की फसल जलमग्न हो चुकी है। जबकि 10 बिस्वा खेती योग्य जमीन कटान की भेंट चढ़ गई।
शुक्रवार को सुबह नौ बजे एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ाव होने से गंगा का जलस्तर 62.080 मीटर दर्ज किया गया। जबकि बृहस्पतिवार को शाम पांच बजे गंगा डेढ़ सेंटीमीटर की रफ्तार से घट रही थी। गंगा का जलस्तर 62.050 मीटर था। इसके पहले दोपहर में तीन बजे स्थिर होने के कारण जलस्तर 62.070 मीटर था। नगर स्थित ददरीघाट, कलक्टर घाट, चीतनाथ, गोलाघाट, रामघाट, अंजनी घाट, पोस्ता घाट, खिड़की आदि गंगा घाटों की अधिसंख्य सीढि़यां डूब गईं हैं। भांवरकोल क्षेत्र में मुबारकपुर से लेकर गहमर सिवान तक एक किलोमीटर के दायरे में कटान जारी रही। कटान के कारण 10 बिस्वा कृषि योग्य जमीन गंगा में समा गई। गंगा के बढ़ते जलस्तर के कारण मुबारकपुर मौजा की मल्लाह बस्ती पर खतरा मंडरा रहा है।
गहमर। 24 घंटे पहले नसीरपुर, वीरऊपुर, हसनपुरा के 600 मीटर लंबे मुख्य मार्ग पर सीने तक पानी था। इसके कारण लोग पानी से होकर आवागमन कर लेते थे। लेकिन, अब मार्ग पर छह फीट तक पानी लग गया है। इससे तीनों गांवों के मुख्य मार्ग पर आवागमन बंद हो गया है लेकिन अब तक प्रशासन की ओर से यहां नाव का संचालन नहीं किया गया है। इसके कारण तीनों गांवों की 3 हजार की आबादी पीछे के रास्ते अठहठा-बसुका-करहिया मार्ग से आवागमन कर रही है। इससे तीन किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। लगभग 50 बीघा सब्जी और चरी की फसल जलमग्न हो चुकी है। इससे तीन हजार किसान प्रभावित हुए हैं। उपजिलाधिकारी सेवराई लोकेश कुमार सिंह ने बताया कि गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए बाढ़ चौकियों एवं स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट रखा गया है।
औड़िहार। सैदपुर के निचले इलाकों पटना, शादी-भादी, फुलवारी, फुलवारी कला, चकेरी देवचंदपुर से लेकर औड़िहार तक गंगा के बाढ़ का कहर देखने को मिल रहा है। इन क्षेत्रों के निचले इलाकों के 50 बीघा खेत बाढ़ के पानी में डूब चुके हैं। यहां किसानों ने सब्जी व चरी की खेती की है। संवाद
गाजीपुर। गंगा की बाढ़ के कारण जिन खेतों में हरा चारा चरी डूब गया है, वहां के किसान अब अपने पशुओं को भूसा खिला रहे हैं। नसीरपुर, विरऊपुर, हसनपुरा गांव के ग्रामीणों का कहना है कि मुख्य मार्ग पूरी तरह डूब चुका है। पानी इसी तरह बढ़ता रहा तो आने वाले दिनों में घर तक पहुंच जाएगा।
जमानिया में गंगा के तटवर्ती बड़ेसर गांव के पास कटान की स्थिति बन चुकी है, जहां गंगा भूमि को काटती हुई एनएच-24 के बेहद करीब पहुंच गई है। यदि पहले से बड़े-बड़े पत्थर के बोल्डर न डाले गए होते तो अब तक गंगा की लहरें सड़क तक पहुंच चुकी होतीं। उपजिलाधिकारी ज्योति चौरसिया ने बताया कि गंगा का जलस्तर धीरे-धीरे बढ़ रहा है और बाढ़ के खतरे को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। निचले इलाकों में पानी के प्रवेश की आशंकाओं को देखते हुए संबंधित विभागों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं। बड़ेसर में कटान रोकने के लिए जेसीबी और श्रमिकों की मदद से बोल्डर बिछाने का कार्य तेज कर दिया गया है। बाढ़ प्रभावितों के लिए राहत शिविरों, भोजन, बिजली, पानी और चिकित्सा सुविधा की व्यवस्था की जा चुकी है। एसडीएम ने कहा कि यदि जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो तटवर्ती इलाकों में बाढ़ का खतरा और अधिक गंभीर हो सकता है। वहीं, तहसीलदार राम नरायण वर्मा ने शुक्रवार को तियरी गांव पहुंचकर नदी के बढ़ते जलस्तर का निरीक्षण किया और संभावित बाढ़ प्रभावित इलाकों की स्थिति की जानकारी ली।