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Ghazipur News: गाजीपुर में अभी भी चेतावनी बिंदु से ऊपर बह रही गंगा

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बाढ़ का पानी घटने के बाद सिधौना गांव के खेतों से जलकुंभी हटाते किसान।  - फोटो : संवाद
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गाजीपुर। गंगा नदी का जलस्तर लगातार घट रहा है। रविवार को भी दो सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से घटाव हो रहा था। हालांकि अभी भी गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु 62.100 मीटर से ऊपर बह रहा है। खतरा अभी बरकरार है। फिर से गंगा का जलस्तर बढ़ना शुरू हुआ तो तटवर्तियों की मुश्किलें और बढ़ेंगी। अभी भी खेतों में से पानी निकला नहीं है। यह राहत वाली बात है कि अधिकांश प्रभावित गांवों के मार्गों से बाढ़ का पानी उतर चुका है। इससे आवागमन पहले की तरह सुगम हो रहा है। कुछ ऐसा ही हाल नगर के गंगा घाटों का है। अधिकांश सीढि़यों से पानी उतर रहा है।
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बाढ़ के बाद जलकुंभी बनी मुसीबत-मौधा। गोमती में आई बाढ़ के सहारे नदी में जलकुंभी आ गई है, जो अब किसानों के लिए मुसीबत बनी हुई है। सिधौना, अमेहता, गौरी, गौरहट, तेतारपुर व खरौना गांव में खेतों में फैली जलकुंभी ने सैकड़ों बीघे फसलों को ढक दिया है। धान, बाजरा, मक्का, नेनुआ, भिंडी, लौकी व बैगन जैसी फैसल जलकुंभी के नीचे दबकर दम तोड़ने लगी है। जलकुंभी एक ऐसा जलीय पौधा है, जो उपजाऊ जमीन की मृदा की क्षमता को नष्ट करने के साथ ही फसलों के लिए जल भराव पोषक तत्वों की कमी को भी बढ़ा देता है। सिधौना निवासी किसान महेंद्र का कहना है कि अगर समय रहते जलकुंभी को नहीं हटाया गया तो किसानों को इससे काफी नुकसान झेलना पड़ेगा। संवाद
300 बीघा सब्जी धान, चरी की फसल जलमग्न है- औड़िहार। बाढ़ का पानी जैसे-जैसे नीचे जा रहा है, कीचड़ नजर आ रहा है। औड़िहार समेत पटना शादीभादी, गोपालपुर, चकेरी, फुलवारी, फुलवारी कला, जौहरगंज, देवचंदपुर, रामपुर मांझा आदि गांवों में बाढ़ के कारण 300 बीघा सब्जी, धान, चरी आदि की फसल जलमग्न हुई है। बाढ़ प्रभावित किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है। वह अभी भी मुआवजे का इंतजार कर रहे हैं।
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कटान की भेंट चढ़ी 12 बिस्वा भूमि- गाजीपुर। भांवरकोल क्षेत्र के शेरपुर के मुबारकपुर बस्ती से गहमर सिवान तक कटान जारी है। 12 बिस्वा कृषि योग्य भूमि कटान के कारण गंगा में समाहित हो गया। गंगा के जलस्तर में बढ़ाव के कारण कटान थमा था। लेकिन, पानी घटने के साथ ही कटान शुरू हो गया है।
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