विश्व का पहला चलता-फिरता अस्पताल 20 नवंबर को सिटी रेलवे स्टेशन पर आएगा। अस्पताल के रूप में आने वाली लाइफ लाइन ट्रेन में कटे-होठ, मोतियाबिंद, कान, दांत, मिर्गी, स्तन कैंसर समेत गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों का आपरेशन व इलाज होगा।
मरीजों का इलाज देश के 40 चिकित्सकों की टीम करेगी। ये जानकारी मंगलवार को सिटी रेलवे स्टेशन का जायजा लेने पहुंचे महेंद्रा कंपनी के सीनियर मैनेजर गिल रॉव और लाइफ लाइन ट्रेन के प्रोजेक्ट मैनेजर डॉ. राहुल ने दी।
लाइफ लाइन ट्रेन के ठहराव और मरीजों के जांच सहित सभी व्यवस्था की रूपरेखा तैयार करने के लिए पहुंचे महेंद्रा कंपनी के सीनियर मैनेजर गिल रॉव और लाइफ लाइन के प्रोजेक्ट मैनेजर डा.राहुल सिटी रेलवे स्टेशन पर मंगलवार को करीब 1 बजे पहुंचे।
इसके बाद उन्होंने मरीजों के आने तथा रजिस्ट्रेशन कराने के लिए कैंप लगाने के लिए स्टेशन परिसर का जायजा लिया। गिल रॉव ने बताया कि जिले में लाइफ लाइन एक्सप्रेस 20 नवंबर से 8 दिसंबर तक सिटी रेलवे स्टेशन पर रहेगी। कंपनी ने देश से विकलांगता को समाप्त कराने के लिए इंपेक्ट इंडिया फाउंडेशन का गठन किया।
इसके बाद रेलवे से 7 कोच लेकर मोबाइल अस्पताल का निर्माण किया। इस अस्पताल का निर्माण 16 जुलाई 1991 को हुआ था। तभी से लेकर आज तक लाइफ लाइन एक्सप्रेस के जरिये देश के सभी जिलों में जाकर कैंप लगाकर छह बीमारियों का इलाज किया जाता है।
उन्होंने बताया कि कटे होठ, कान के अति गंभीर रोग तथा मोतियाबिंद का आपरेशन करने के लिए ट्रेन में 2 शल्य कक्ष और 5 शल्य टेबुल मौजूद हैं। साथ ही स्तन और गर्भाशय कैंसर से पीड़ित महिलाओं का भी इलाज किया जाएगा।
अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान नई दिल्ली, केजीएमसी लखनऊ, हिंदूजा अस्पताल मुंबई तथा इलाहाबाद के नामचीन डॉक्टरों की टीम मौजूद रहेगी।
इसमें चिकित्सा संबंधि विश्व की सभी अत्याधुनिक मशीनें उपलब्ध हैं। कैंप में प्रतिदिन 140 मरीजों का उपचार होगा। इस अवसर पर केंद्रीय रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा के निजी सहायक सिद्धार्थ राय, अभिषेक, अंकुर प्रकाश मौजूद रहे।