भीमापार मार्ग पर बैठे दुर्घटना को आमंत्रण देते छुट्टा पशु। संवाद
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मौधा। जिले में बेसहारा पशुओं को सुरक्षित रखने के लिए सरकार ने भले ही पशु आश्रय केंद्रों की स्थापना कर रखी हो लेकिन हकीकत यह है कि जितने पशु इन आश्रय केंद्रों में मौजूद हैं। इससे चार गुना अधिक बाहर घूमकर फसलों को नष्ट कर रहे हैं। इसके अलावा अधिकांश सड़क दुर्घटनाएं भी इन्हीं की वजह से हो रही हैं। हालांकि सब कुछ जानते हुए भी जिम्मेदार चुप्पी साधे हुए हैं। बेसहारा पशु फसलों को नुकसान न पहुंचा सकें और सड़कों पर न घूम सकें, इसके लिए इनकी सुरक्षा और देखभाल के लिए मुख्यमंत्री की ओर से जिले में पशु आश्रय केंद्रों की स्थापना की गई है। यहां चारे से लेकर पशुओं के रहने के बेहतरीन इंतजाम के आदेश भी दिए गए हैं। पशु आश्रय केंद्रों पर मौजूद पशुओं को चारे के लिए पंचायत स्तर बनी समिति के खाते में तीस रुपये प्रति पशु प्रतिदिन के हिसाब से भेजा जाता है। इसमें भूसा, चूनी-चोकर सहित हरा चारा भी देने का प्रावधान रखा गया है। पूरे जिले में दो स्थायी और 29 अस्थाई पशु आश्रय केंद्र हैं। इसमें 2750 पशुओं को संरक्षित किया गया है। बावजूद इसके बड़ी संख्या में छुट्टा पशु बाहर घूम रहे हैं। शहर हो या नगर, गांव हो अथवा ग्रामीण क्षेत्र हर जगह सड़कों और गलियों में ढेर सारे पशु झुंड में टहलते मिल जाएंगे। इनसे हमेशा दुर्घटना भी होती रहती है। लगभग यही हाल ग्रामीण इलाकों का भी है जहां वह झुंड के झुंड खेतों में पहुंचकर फसलों का नुकसान कर रहे हैं। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. एसके रावत ने कहा कि समय-समय पर पशुओं को पकड़ने का अभियान चलाया जाता है। पकड़े गए पशुओं को पशु आश्रय केंद्रों में रखा जाता है। वहां उनके खाने-पीने का उचित प्रबंध है। साथ ही बीमारियों से बचाव के लिए उनका टीकाकरण भी कराया जाता है।