बाढ़ के पानी में क्षतिग्रस्त भांवरकोल से कबीरपुर एवं लठ्ठूडीह जाने वाली सड़क से जाते लोग।
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बाढ़ के चलते संपर्क मार्गों के क्षतिग्रस्त हो जाने से करीब दो माह से लोगों को आवागमन में परेशानी है। बाढ़ के खत्म हो जाने के बाद भी अभी ग्रामीणों के लिए इसका कहर खत्म नहीं हुआ है। क्षेत्रों में लोगों का जनजीवन बुरी तरह अस्तव्यस्त है।
गंगा के साथ उफनाई सहायक नदियों ने बीते कुछ दिन पूर्व बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लोगों का जन-जीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया था। लेकिन अब बाढ़ का पानी उतर जाने से कई दिक्कतें सामने आने लगी हैँ। कबीरपुर-लठूडीह मार्ग पर पड़ने वाले अवथहीं गांव स्थित इंटर कालेज, रेवसड़ा-अवथही, मुसरदेवा-देवरिया, मलिकपुरा और करीमुद्दीनपुर मार्ग के लौवाडीह गांव के पास, जोगा-देवरिया, भांवरकोल- लठूडीह मार्ग अवथही और दहिनवर गांव के बीच, सुखडेेहरा-लोचाइन, खैराबारी-बसनिया, कोटवानारायणपुर-गोड़ऊर, पातालगंगा-नकटीकोल मार्ग और मच्छटी -महेशपुर संपर्क मार्ग पूरी तरह से टूट चुका है। संपर्क मार्गो के टूट जाने से आवागमन करीब दो माह से पूरी तरह से बंद पड़ा हुआ है। सबसे अधिक दिक्कत का सामना तो तब करना पड़ रहा जब किसी भी व्यक्ति की तबीयत अचानक बिगड़ जा रही है। संपर्क मार्ग के कटे होने के चलते परिजन मरीजों का बेहतर इलाज नहीं करा पा रहे हैं। स्कूली बच्चों को भी दिक्कत उठानी पड़ रही है।
कुछ दिन पूर्व इन क्षेत्रों का दौरा करने आए वाराणसी मंडल के आयुक्त नितिन रमेश गोकर्ण ने डीएम को इन संपर्क मार्गो को जल्द से जल्द बनवाने का निर्देश दिया था। डीएम की ओर से संबंधित विभाग के अधिकारियों को कार्य शुरू करने का निर्देश दे दिया गया था। लोक निर्माण विभाग की ओर से बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में क्षतिग्रस्त हुए संपर्क मार्गो तथा पुलिया का सर्वे कराकर निर्माण के लिए धनराशि भेजने का प्रस्ताव शासन की ओर से भेज दिया गया लेकिन शासन की ओर से प्रस्ताव पर मुहर नहीं लगने के चलते अभी भी क्षतिग्रस्त हुए संपर्क मार्गो का निर्माण कार्य नहीं शुरू हो पाया है। इसके चलते लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।