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पांच दिनों में गंगा में समाहित हुई पांच बीघा भूमि

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गाजीपुर। अब कटान के निशाने पर तुलसीपुर गांव आ गया है। गंगा के जलस्तर में वृद्धि होने से पांच दिनों में विभिन्न किसानों की पांच बीघा भूमि कटकर गंगा में समाहित हो गई है। इससे किसानों के माथे पर बल पड़ गया है। उनकी चिंता इस बात से बढ़ गई है कि जलस्तर में जितनी वृद्धि होगी, उतनी ही उनकी भूमि गंगा की भेंट चढ़ेगी।
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पिछले दिनों से गंगा के जलस्तर में तेजी से वृद्धि का क्रम शुरु हो गया था। हालांकि रविवार से बढ़ाव का क्रम थम गया है। जलस्तर में वृद्धि होने की वजह से पूजन बाबा आश्रम के पश्चिम तरफ तुलसीपुर गांव में पांच दिनों में विभिन्न किसानों की पांच बीघा कृषि योग्य भूमि कटकर गंगा में समाहित हो गई। जिन किसानों की भूमि कटी, उनमें दीनापुर के रविंद्र सिंह, जयशंकर सिंह, विजय सिंह, मिंटू सिंह, यतींद्र नाथ सिंह, बद्री गिरि, शैलेंद्र सिंह, विजय सिंह, अजय सिंह, संजय सिंह, प्रेम सिंह, शिवबचन सिंह, नीरज सिंह, ओंकार सिंह, अमरनाथ सिंह, रसीद मिया, सुरेंद्र यादव, अशोक यादव, नरेंद्र यादव, प्रवीण सिंह आदि शालिम है। पीड़ितों ने बताया कि यदि गंगा के जल स्तर में वृद्धि का क्रम नहीं रुका तो और भी भूमि कटने की संभावना है। मालूम हो कि पिछले वर्ष पुरैना, बयेपुर, सोकनी, बड़हरिया और रफीपुर में कटान का कहर जारी था। भारी मात्रा में भूमि कटकर गंगा में समाहित हो गई थी। पीड़ितों ने स्वाभिमान संगठन के बैनर तले कई बार जिलाधिकारी और जनप्रतिनिधियों से कटान रोकने का उपाय की गुहार लगाई थी। इस पर पूर्व मंत्री मनोज सिन्हा से प्रयास से लगभग 12 करोड़ की लागत से तीन किलोमीटर लम्बे क्षेत्र में जीओ ट्यूब लगाने और बोल्डर पीचिंग का कराया गया था, जिससे यहां पर कटान पूरी तरह से रुक गया है। अब कटान के निशाने पर तुलसीपुर गांव आ गया है।
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