गाजीपुर। जनपद में दो करोड़ की लागत से विभिन्न गंगा घाटों पर पांच सामुदायिक जेटी का निर्माण किया गया है। इनका निर्माण हुए एक वर्ष बीत गया। साथ ही हैंडओवर हुए भी करीब आठ महीने का समय बीत चुका है। लेकिन, अभी तक इनका लाभ जनपद को मिलता हुआ नहीं दिख रहा है। जेटी के निर्माण के समय दावा किया गया था कि इससे जल यातायात, जल परिवहन व जल व्यापार को बढ़ावा मिलेगा, जिससे मछुआरे, किसान व व्यापारी लाभान्वित होंगे। लेकिन, जिम्मेदारों की सुस्ती के कारण अभी तक जनपद का सपना अधूरा है।
भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण की ओर से शहर के पोस्ता घाट, ददरीघाट, कलक्टरघाट पर सामुदायिक जेटी का निर्माण किया गया है। इसके अलावा एक-एक सामुदायिक जेटी का निर्माण जमानिया के बलुआ घाट व करंडा के चोचकपुर गंगा घाट पर किया गया है। एक सामुदायिक जेटी के निर्माण पर 40 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। इस तरह से जनपद में पांच सामुदायिक जेटी के निर्माण पर दो करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण की ओर से सामुदायिक जेटी का निर्माण करने के बाद शहरी क्षेत्रों में नगर निकाय व ग्रामीण इलाकों में पंचायती राज विभाग को हैंडओवर कर दिया गया।
जेटी निर्माण के समय किए गए दावे
जल व्यापार को मिलेगा बढ़ावा
जल परिवहन को लगेंगे पंख
जल पर्यटन की बढ़ेंगी संभावनाएं
गंगा के इस पार से उस पार तक किसानों को उत्पादों को बेचने में मिलेगी सहूलियत
दूधियों व मछुआरों को मिलेगी सहूलियत
गंगा की लहरों पर सेल्फी पॉइंट का बनेगा प्लेटफॉर्म
ये सुविधाएं भी साबित हो रहीं निरर्थक
जेटी निर्माण संग ही टिकट घर, टर्मिनल विश्रामालय, वेटिंग रूम का निर्माण के साथ ही शेडिंग कार्य कराया गया है। एक ओर जहां गंगा के लहरों पर सामुदायिक जेटी बेमतलब तैर रहे हैं, तो दूसरी तरफ घाटों पर टिकट घर, टर्मिनल विश्रामालय, वेटिंग रूम आदि शो-पीस बने हुए हैं।
बगैर इस्तेमाल हुए टूट गए शीशे
केस एक
शहर के पोस्ता घाट पर सामुदायिक जेटी के लिए बनाए गए टर्मिनल विश्रामालय के दरवाजे व शीशे टूटे हुए नजर आए। जबकि अब तक इसका इस्तेमाल भी शुरू नहीं किया गया है। इससे पहले टर्मिनल विश्रामालय की दुर्दशा जिम्मेदारों की कार्यशैली पर सवाल खड़ा कर रही है।
40 लाख की जेटी बनी शो-पीस
केस दो
करंडा के चोचकपुर गंगा घाट पर सामुदायिक जेटी गंगा के लहरों पर तैरती नजर आई। इसके अंदर कोई गतिविधि नहीं होने के कारण मौके पर सन्नाटा पसरा रहा। 40 लाख की सामुदायिक जेटी के शो-पीस बने होने के कारण क्षेत्र के लोगों के सपने टूट रहे हैं।
सामुदायिक जेटी का लाभ जनपद को मिल सके, इसकी व्यवस्था करनी चाहिए। निर्माण के समय बड़े-बड़े दावे किए गए थे, लेकिन अभी तक दावे धरातल पर मूर्त रूप नहीं ले पाए हैं।- रणजीत यादव, चौकिया
सामुदायिक जेटी के निर्माण पर भारी-भरकम धनराशि खर्च की गई है। इसलिए जिम्मेदारों को यह तय करना चाहिए कि इसका लाभ भी लोगों को मिल सके।- राजेंद्र पांडेय, लोदीपुर जमानिया
निर्माण हुए एक वर्ष से अधिक का समय हो चुका है। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि सामुदायिक जेटी का लाभ जल्द से जल्द लोगों को मिले।- सुनील कुमार, खिजिरपुर
गंगा का जलस्तर कम होने के बाद सामुदायिक जेटी का संचालन किया जाना सुनिश्चित किया जाएगा।- सुनील कुमार त्रिवेदी, मुख्य राजस्व अधिकारी