गाजीपुर के अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम रिजवानुलहक ने मंगलवार को आपराधिक मानव वध के मामले में पांच सगे भाइयों को दस साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। साथ ही प्रत्येक पर 20-20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड में से आधी राशि वादी को देने का आदेश दिया गया है। धनराशि न देने पर एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। मंदिर से शादी नहीं कराने के विवाद के दौरान मारपीट में मौत का मामला है।
अभियोजन के अनुसार थाना कोतवाली के खुदाई पूरा निवासी राजा ने का आरोप था कि 15 अप्रैल 2011 को उसके भाई प्रदीप की लड़की का तिलक सैदपुर कस्बे में होना था। लड़के वाले चंदौली जिले से आए थे। उसके तिलक में राजा के मोहल्ले के विंध्याचल, प्रेम, भानु, संतोष एवं अशोक भी आए थे। तिलक कार्यक्रम समाप्त होने पर शादी ददरीघाट मंदिर पर होना तय हुई।
इसी बात को लेकर विंध्याचल नाराज होकर विवाद करने लगे। कहा शादी मंदिर से नहीं होगी। आपस में झगड़ा सुलझाकर वापस घर आ गए। रात करीब साढ़े आठ बजे अपने भाइयों के साथ राजा उनके घर पहुंच गया और उसके भाई शार्दूल को लात मुक्के से मारने लगा। शार्दूल को गंभीर चोट आई।
इलाज के दौरान सदर अस्पताल में उसकी मौत हो गई। कोतवाली में पांच आरोपियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया गया। सभी के खिलाफ न्यायालय में आरोप-पत्र दाखिल किया गया। अभियोजन की तरफ से अपर शासकीय अधिवक्ता नीरज श्रीवास्तव ने कुल नौ गवाहों को पेश किया। सभी गवाहों ने घटना की पुष्टि की। अभियोजन एवं बचाव की ओर से बहस सुनने के बाद अदालत ने पांचों अभियुक्तों को दोषी पाया और उपरोक्त सजा सुनाई।