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वित्त मंत्री की प्रतीकात्मक शवयात्रा निकाली

Tue, 15 Mar 2016 11:43 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,गाजीपुर
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वित्त मंत्री का पुतला फूंका - फोटो : अमर उजाला
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ज्वैलरी पर उत्पाद शुल्क लगाने के विरोध में आंदोलनरत सराफा व्यापारियों ने मंगलवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली की प्रतीकात्मक शव यात्रा निकाली। नवाबगंज से चलकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे सराफा व्यापारियों ने प्रतीकात्मक शव का दाह संस्कार किया। इस दौरान व्यापारियों ने जमकर नारेबाजी की। सराफा व्यापारियों के आंदोलन को शिक्षणेतर राज्य कर्मचारी संघ ने भी समर्थन दिया।
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पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत बड़ी संख्या में सराफा व्यापारी मंगलवार की सुबह नवाबगंज में एकत्रित हुए। यहां केंद्र सरकार की नीतियों को व्यापारी विरोधी बताते हुए उत्पाद शुल्क को वापस लेने की मांग की। इसके बाद व्यापारियों ने वित्त मंत्री अरुण जेटली का प्रतीकात्मक शव यात्रा निकाली। इसमें शामिल व्यापारी केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे जबकि आगे-आगे ढोल नगाड़े बजाए जा रहे थे।

शव यात्रा का नेतृत्व सराफा व्यापार मंडल के नेताओं के साथ शिक्षणेतर राज्य कर्मचारी संघ के अध्यक्ष विवेक सिंह शमी ने किया। इस दौरान व्यापारी नेताओं ने कहा कि जब तक उत्पाद शुल्क वापस नहीं लिया जाता है तब तक उनकी हड़ताल जारी रहेगी।
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सराफा व्यापार मंडल के संरक्षक जवाहरलाल वर्मा ने कहा कि स्वर्ण कारीगर, सराफा व्यापारियों का संघर्ष व्यर्थ नहीं जाएगा। उनकी ताकत के आगे केंद्र सरकार को झुकना पड़ेगा। प्रतीकात्मक शवयात्रा में उद्योग व्यापार मंडल, न्यू अखिल भारतीय स्वर्णकार समाज, स्वर्णकार संघ, स्वर्ण कारीगर संघ के अलावा मुहम्मदाबाद, जंगीपुर, जमानिया, बहादुरगंज, जखनिया के व्यापारियों ने हिस्सा लिया। इस मौके पर संतोष वर्मा, श्याम विहारी वर्मा, दयाशंकर वर्मा, दीपू वर्मा, आजाद वर्मा, कमलेश वर्मा, अनूप वर्मा, संजय अग्रहरि, नंदलाल, अमर अग्रहरि, सतीश वर्मा, रुपेश वर्मा, कैलाशनाथ वर्मा, मनोज, सुरेंद्र,राजेंद्र प्रसाद, आशीष वर्मा आदि मौजूद रहे।

आर्थिक तंगी से जूझ रहे कारीगर
सराफा व्यापारियों की हड़ताल से सराफा कारोबार सूना पड़ गया है। ग्राहक दुकानों के चक्कर काट रहे हैं लेकिन न तो वे खरीदारी कर पा रहे हैं और न ही जेवर की मरम्मत करा पा रहे हैं। सराफा की दूकानों पर काम करने वाले कारीगरों को भी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।

सराफा कारीगर जयदेव वर्मा ने बताया कि दूकानें बंद हो जाने से सभी व्यापारियों और ग्राहकों के सामने परेशानी पैदा हो गई है। वर्तमान में खरवास चलने के कारण हिंदू समुदाय में शादियां नहीं हो रही हैं लेकिन अन्य समुदायों के लोगों को जेवर की खरीदारी के लिए भटकना पड़ रहा है। सराफा व्यापारी आजाद  वर्मा ने बताया कि स्थानीय कस्बा में बड़ी मंडी नहीं है। एक दूकान से करीब 10 कारीगरों का भरण पोषण होता है। दूकानें बंद होने से उनके सामने भुखमरी की समस्या पैदा हो गई है।

अजीत वर्मा ने बताया कि दूकानें बंद होने से ग्राहकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।  वहीं जरूरतमंद जेवर बंधक रखकर रुपये की व्यवस्था नहीं कर पा रहे हैं।
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