मानसून के सक्रिय होते ही किसानों ने अपने खेतों में खरीफ की फसल धान, ज्वार, बाजरा, अरहर आदि की बुआई शुरू कर दी है लेकिन सहकारी समितियों से उर्वरक नहीं मिलने से किसान परेशान हैं। समितियों में खाद का स्टाक भी मौजूद है लेकिन पीओएस मशीन के न चलने से किसान खाद के लिए समिति का चक्कर लगाकर वापस लौट जा रहे हैं।
सहकारिता विभाग की ओर से नई व्यवस्था के अंतर्गत सहकारी समितियों पर पीओएस मशीन के जरिए उर्वरक ट्रांजेक्शन अनिवार्य कर दिए जाने से सचिवों के सामने उर्वरक वितरण करना एक समस्या बन गई है। जून के पहले सप्ताह में कृषि विभाग की तरफ से सभी सहकारी समिति के सचिवों को पीओएस मशीन उपलब्ध करा दी गई।
उन्हें निर्देश दिया गया कि वह नगद बिक्री अथवा ऋण पर जो भी उर्वरक किसानों को देंगे उनके आधार कार्ड का नंबर डालकर एवं किसान का अंगूठा लगने के बाद एक पर्ची निकलेगी तभी उन्हें उर्वरक मिल सकेगा। उर्वरक का स्टाक भी तभी खारिज होगा।
इसके लिए बाकायदा विकास भवन में इफको के क्षेत्रीय प्रबंधक आशीष श्रीवास्तव द्वारा जनपद के सहकारी समिति के सचिवों को ट्रेनिंग दी गई लेकिन अधिक उम्र वाले सचिव मशीन को चला पाने में अपने को असमर्थ पा रहे हैं। साथ ही बहुत सी समितियों के कार्यालय पर मोबाइल का नेटवर्क काम न करने के कारण भी मशीन नहीं चल पा रही है। इससे किसानों को उर्वरक नहीं मिल पा रही है। बारिश होने के बाद खेती का कार्य तेजी पर है।
किसान अपने खेतों में डीएपी खाद डालकर बोआई करना चाहते हैं। समितियों में खाद का स्टाक भी मौजूद है लेकिन पीओएस मशीन के न चलने से किसान खाद के लिए समिति का चक्कर लगाकर वापस लौट जा रहे हैं। इस नई व्यवस्था से किसानों को खाद मिल सकेगी इसकी संभावना दूर-दूर तक नजर नहीं आ रही है।
सचिवों का कहना है कि उन्हें मशीन चलाने की ट्रेनिंग तो दी गई लेकिन व्यवहार के तौर पर वह उसे संचालित नहीं कर पा रहे हैं। कहीं टावर के न काम करने से मशीन नहीं चल पा रही है तो किसी समिति पर किसानों की भारी भीड़ हो जाने पर भी आधार और अंगूठा लगाने के बाद किसानों को खाद दे पाना काफी कठिन कार्य हो जा रहा है। किसानों के आक्रोश से बचने के लिए सचिव गोदाम बंदकर चले जा रहे हैं।
किसान संघ के नेता अवधेश कुशवाहा एवं बसपा नेता बलिराम पटेल ने मांग की है कि खरीफ के पीक आवर में पीओएस मशीन की जगह पर किसानों को पुरानी व्यवस्था के अनुसार उर्वरक उपलब्ध कराई जाए।