गाजीपुर। अब किसानों को यूूरिया लेने के लिए आधार कार्ड ओर जोत बही का दिखाना होगा। इसक कारण यह है कि दुकानों और साधन सहकारी समितियों पर पीओएस मशीन से यूरिया का वितरण किया जा रहा है। जिले में यूरिया की कालाबाजारी रोकने के लिए प्रशासन ने यह कदम उठाया है। जिले में फिलहाल 32 हजार मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध है।
पिछले दिनों यूरिया की किल्लत होने से किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ा। कुछ किसानों को जरूरत के हिसाब से ज्यादा यूरिया मिल गया तो कुछ किसानों को एक भी बोरी नहीं मिल पाई। जिले के चार लाख आठ हजार किसान दो लाख हेक्टेयर से ऊपर खेती योग्य भूमि में फसलों की बुआई करते हैं। जिले में करीब एक लाख 51 हजार हेक्टेयर में धान की खेती की गई है। इस साल कृषि विभाग की ओर से 27 हजार 500 मीट्रिक टन यूरिया का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। करीब एक सप्ताह पूर्व यूरिया की किल्लत से किसानों को जूझना पड़ा था। विभाग की ओर से दो हजार 631 मीट्रिक टन यूरिया बीते 28 अगस्त को मंगाई गई थी, जिससे किसानों को खाद की समस्या का सामना न करना पड़े। कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए दुकानों और 164 साधन सहकारी समितियों पर पीओएस मशीन से खाद का वितरण कराया जा रहा है। धान की बुआई के समय 50 प्रतिशत यूरिया का छिड़काव किया जाता है। इसके बाद, 50 प्रतिशत यूरिया का छिड़काव दो बार किया जाता है। किसान वर्षा होने के चलते अधिक यूरिया का प्रयोग कर रहे हैं। इससे खाद की कमी हुई थी लेकिन अब जिले में लक्ष्य से अधिक यूरिया उपलब्ध है।
खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए किसानों को साधन सहकारी समितियों और दुकानों से पीओएस मशीन से यूरिया बांटा जा रहा है। आधार कार्ड और जोत बही पर दर्ज खेती योग्य भूमि के मुताबिक ही किसानों को खाद दिया जाएगा। खाद की कालाबाजारी करने वाले दुकानदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। - मृत्युंजय सिंह, जिला कृषि अधिकारी