दैवी आपदा की मार झेल रहे किसानों के साथ किए गए धोखे का राज अब सामने आने लगा है। पूरे विकास खंड के किसान सहकारी समितियों से रवि की फसल के लिए जब डीएपी एवं यूरिया लिया तो तीन प्रतिशत बीमा की धनराशि भी जमा कराई गई। अब-जब फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है, और किसान क्लेम करने के लिए जिला सहकारी बैंक गए तो उन्हें पता चला की बीमे का प्रीमियम कंपनी को भेजा ही नहीं गया, जिसके चलते हजारों किसान क्लेम पाने से वंचित हो गए हैं। प्रभावित किसानों में आक्रोश्ा है।
राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना के तहत सहकारी समितियों से जुड़े किसानों को रवि की फसल के लिए डीएपी एवं यूरिया लेते समय अनिवार्य था। इसमें खाद के मूल्य के साथ तीन प्रतिशत बीमा धनराशि देना आवश्यक है। सभी समितियों में बीमा का पैसा भी लिया गया। इसके बावजूद भी धन राशि को बीमा कंपनी को जिला सहकारी बैंक कासिमाबाद के माध्यम से नहीं भेजा गया। सहकारी बैंक के शाखा प्रबंधक माधुरी आनंद ने बताया कि सभी समितियों से बीमा धनराशि लगभग तीन लाख बीस हजार रुपए बैंक को मिला है, जबकि समितियों के सचिवों ने समय से ग्रामवार सूची नहीं उपलब्ध कराई, जिससे आईसीआईसीआई लाेंबार्ड जनरल बीमा कंपनी को पैसा नहीं जा सका है। अब धनरािश किसानों के ऋण खाते में जमा करा दिया गया है। क्षेत्र के सहाबुद्दीपुर के कल्पनाथ सिंह ने बताया कि मैंने 18 बीघे खेत के लिए समिति से खाद ली थी। साथ ही बीमा की धनराशि भी जमा की थी। इसके बावजूद क्षति पूर्ति नहीं मिल रही है। मखदूमपुर के लल्लन राजभर का कहना है कि किसानों के साथ यह अन्याय है। इफको के निदेशक राजकुमार त्रिपाठी ने बताया कि इस तरह का खेल पूरे प्रदेश में किसानों के साथ बीमा कंपनीयों द्वारा किया जा रहा है।