फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Abbas Ansari: 'अब्बास अंसारी के परिवार की है आपराधिक पृष्ठभूमि', टिप्पणी कर एमपी-एमएलए कोर्ट ने खारिज की अपील

Fri, 18 Aug 2023 08:20 PM IST
उत्पल कांत अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर

सार

माफिया मुख्तार के विधायक बेटे अब्बास अंसारी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। गाजीपुर जिले की की एमपी-एमएलए कोर्ट ने शु्क्रवार को  होटल लैंड डील केस में अब्बास अंसारी की अपील खारिज कर दी है। 
विज्ञापन
विधायक अब्बास अंसारी - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

माफिया मुख्तार अंसारी के पुत्र व मऊ विधायक अब्बास अंसारी को विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए) अरविंद मिश्र की अदालत से शुक्रवार को झटका लगा। अदालत ने किशोर अपचारी मामले में अब्बास अंसारी की अपील को खारिज कर दिया। अभियोजन के अनुसार सदर तहसील के लेखपाल सत्य प्रकाश द्वारा 19 अगस्त 2020 को कोतवाली में तहरीर दी गई थी। जिसके मुताबिक मुहम्मदपट्टी में बंजर के रूप में दर्ज जमीन पर रविंद्र नाथ शर्मा, श्रीकांत उपाध्याय व अरशदपुर के नंदलाल का नाम दर्ज किया गया था।
विज्ञापन


जिसे तत्कालीन जिलाधिकारी द्वारा निरस्त करते हुए पुनः बंजर के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया गया था। बावजूद इसके कूटरचित तरीके से अब्बास अंसारी व उमर अंसारी की तरफ से अपनी माता अफ्शा अंसारी के हक में जमीन पर नाम दर्ज करा दिया गया। इस सूचना के आधार पर कोतवाली में अब्बास अंसारी सहित 12 लोगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज हुआ।

विवेचना के बाद पुलिस ने आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र पेश किया। न्यायालय में अब्बास अंसारी को किशोर मानते हुए उनकी पत्रावली को किशोर न्याय बोर्ड भेजने का आदेश दिया। जहां पर किशोर अपचारी अब्बास अंसारी की जमानत किशोर न्यायालय ने 6 जून को निरस्त कर दिया। इस आदेश के विरुद्ध 14 जून को जिला जज के न्यायालय में अपील दाखिल की।
विज्ञापन

ये भी पढ़ें: माफिया मुख्तार अंसारी का करीबी जफर खां गिरफ्तार, हत्या के मामले में जारी हुआ था वारंट
Trending Videos
विज्ञापन

कोर्ट ने क्या कहा

इसके बाद सुनवाई के लिए अपील को विशेष न्यायालय एमपी-एमएलए कोर्ट में भेज दिया गया। यहां बहस होने के बाद न्यायालय ने आदेश के लिए 18 अगस्त की तिथि नियत की। शुक्रवार को न्यायालय ने इस अपील को यह कहते हुए की किशोर की पारिवारिक आपराधिक पृष्टभूमि को देखते हुए यह स्पष्ट है कि वह पुनः उसी परिवेश में जाएगा तो उसके आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता, जिसके फलस्वरूप उक्त अधिनियम को पारित करने की मूल भावना प्रस्तुत प्रकरण के संबंध में समाप्त हो जाएगी। ऐसी परिस्थिति में किशोर को जमानत पर रिहा करने की परिस्थिति में न्याय का उद्देश्य विफल होने की पूरी संभावना है। यह टिप्पणी करते हुए अपील को निरस्त कर दिया।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें