इसके बाद सुनवाई के लिए अपील को विशेष न्यायालय एमपी-एमएलए कोर्ट में भेज दिया गया। यहां बहस होने के बाद न्यायालय ने आदेश के लिए 18 अगस्त की तिथि नियत की। शुक्रवार को न्यायालय ने इस अपील को यह कहते हुए की किशोर की पारिवारिक आपराधिक पृष्टभूमि को देखते हुए यह स्पष्ट है कि वह पुनः उसी परिवेश में जाएगा तो उसके आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता, जिसके फलस्वरूप उक्त अधिनियम को पारित करने की मूल भावना प्रस्तुत प्रकरण के संबंध में समाप्त हो जाएगी। ऐसी परिस्थिति में किशोर को जमानत पर रिहा करने की परिस्थिति में न्याय का उद्देश्य विफल होने की पूरी संभावना है। यह टिप्पणी करते हुए अपील को निरस्त कर दिया।