गाजीपुर। जीवनदायिनी गंगा को स्वच्छ और निर्मल बनाने के लिए सरकारों की तरफ से पानी की तरह पैसा बहाया जा रहा है, लेकिन गंगा को स्वच्छ और निर्मल होने से उसमें गिरने वाले नाले रोक रहे हैं। जिले में करीब दो दर्जन नालों का गंदा पानी गंगा में गिरते हुए उसे प्रदूषित कर रहा है। गंदगी की वजह से स्नानार्थियों को जहां दिक्कतें हो रही हैं, वहीं इस बात से निराशा भी हो रही है कि अगर गंगा में नाला का पानी गिरेगा तो पतित पावनी स्वच्छ कैसे होगी।
नगर की आबादी लगभग सवा लाख है। लोगों के घरों से निकलने वाला गंदा पानी नाला के माध्यम से नगर में ददरीघाट, कलेक्टर घाट, चीतनाथ घाट, स्टीमर घाट, अंजही घाट, पत्थर घाट, बड़ा महादेवा घाट, छोटा महादेवा घाट, पत्थर घाट, नवापुरा घाट, सिकंदरपुर घाट, जनाना घाट, खिड़की घाट, पोस्ता घाट सहित अन्य कई गंगा घाटों से गंगा में गिरता है। इसके अलावा, मुहम्मदाबाद, सैदपुर, जमानिया, करंडा सहित अन्य तटवर्ती इलाकों का प्रदूषित पानी गंगा में ही जा रहा है। नगर के पक्के घाटों से नाला सटा हुआ है। इससे पानी गंदा होने से स्नानार्थियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। नहाने और कपड़ा धोने में प्रयोग किए गए जाने वाले साबुन आदि का केमिकल गंगा तक पहुंच रहा है। केमिकल जल जीवों के लिए खतरा है। सरकार गंगा को स्वच्छ बनाने के लिए तमाम कवायद कर रही है। गंगा को स्वच्छ रखने के लिए प्रचार-प्रसार के साथ ही विभिन्न माध्यमों से लोगों को इसके लिए जागरूक कर रही है। पानी की तरह पैसा बहा रही है लेकिन जब तक नालों के गंदा पानी को गंगा में गिरने से रोका नहीं जाएगा, तब तक पतित पावनी को स्वच्छ और निर्मल बनाना कैसे संभव हो पाएगा। अगर जीवनदायिनी गंगा को स्वच्छ करना है तो नाला के पानी को बंद करना होगा।
पानी हो जाता है काला
गाजीपुर। गर्मी के मौसम में पतित पावनी का दायरा सिमट जाता है। जगह-जगह काफी लंबी चौड़ी रेत पड़ जाता है। ददरीघाट, चीतनाथ घाट सहित कुछ घाटों पर गंगा का प्रवाह रुक जाता है। इससे घाटों पर गिर रहे नाला के पानी की वजह से गंगा में प्रवाह न होने से गंगा का पानी काला हो जाता है। इससे स्नानार्थियों की परेशानी बढ़ जाती है। लोग स्नान करने से कतराने के साथ ही पूजापाठ के लिए गंगा जल लेने से भी परहेज करते हैं। नाव से लोग गंगा रेत पर जाते हैं और स्नान करने के बाद लौटते हैं।