जिले में डेंगू के मरीजों की बढ़ती संख्या जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। मुहल्लों में फागिंग, दवाओं के छिड़काव का दावा कागज पर तो खूब किया जा रहा है लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। ग्रामीण इलाकों में तो दूर-दूर तक दवा छिड़काव एवं फागिंग का धुआं तक नहीं दिखाई पड़ रहा है। सिर्फ मरीजों के मिलने पर कार्रवाई का दावा किया जा रहा है। वर्तमान समय में जिले में डेंगू पीड़ित मरीजों की संख्या 122 है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग इस बीमारी से निपटने के लिए बेडों को सुरक्षित करने के साथ दवाओं और जांच को लेकर ठोस कदम उठा रहा है।
करीब एक माह से डेंगू के मरीजों की संख्या लगातार जनपद में बढ़ती जा रही है। मरीजों के मिलने की सूचना पर जहां स्वास्थ्य विभाग की टीम उस इलाके में पहुंचकर जांच एवं दवा वितरण के साथ आस-पास के लोगों को जागरूक करने में जुटी हुई है। वहीं फागिंग एवं दवा छिड़काव की जिम्मेदारी संभालने वाले विभाग की ओर से अब तक सिर्फ कागजों में ही सारे कार्य पूर्ण किए जा रहे हैं।
खासकर ग्रामीण इलाकों की स्थिति ऐसी है कि कहीं सड़क पर पानी लगा हुआ है तो कहीं नालियां बजबजा रही है। मच्छरों का प्रकोप ऐसा है कि वहां के लोगों को संक्रामक बीमारियों विशेषकर डेंगू का भय सता रहा है। बावजूद संबंधित विभाग द्वारा ग्राम प्रधानों के जरिए ग्रामीण इलाकों में साफ-सफाई के साथ फागिंग को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है।
अब तक 3638 की किट से हुई जांच
गाजीपुर। मलेरिया अधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि अब तक किट के द्वारा 3638 संदिग्धों की जांच की गई। वर्तमान समय में डेंगू के 122 मरीज हैं। जिला अस्पताल में 25 बेड सुरक्षित किए गए है, जिसमें तीन डेंगू के मरीज भर्ती हैं। जबकि 12 सामुुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर 60 बेड सुरक्षित है, जिसमें एक संदिग्ध मरीज भर्ती है। यहीं नहीं निजी अस्पतालों में भी 32 बेड सुरक्षित है। डेंगू से प्रभावित ग्रामों में मोबाइल यूनिट के द्वारा मौके पर पहुंचकर बुखार पीड़ित मरीजों को उपचार किया जा रहा है।
जिले में डेंगू तेजी से फैल रहा है। सिर्फ जुबानी और कागजों में ही दवा का छिड़काव कराया जा रहा है। स्थिति यह है कि गांव-गांव घुमकर लोगों को जागरूक करने का दावा भी संबंधित विभाग का झूठा है। तबरेज
गांव में न तो फागिंग कराई जा रही है और न ही साफ-सफाई की व्यवस्था ही है। ऐसे में एक ही बार में कह देना कि संबंधित विभागों द्वारा ठोस कदम उठाया जा रहा है गलत होगा। अभी तक कोई व्यवस्था तक नहीं दिखाई पड़ी।- ओमप्रकाश
स्वास्थ्य विभाग की टीम तो दिखाई भी पड़ती है, लेकिन लार्वा रोधी दवा का छिड़काव और फागिंग को लेकर कोई सार्थक कदम किसी भी स्तर से उठाया ही नहीं जाता है। अभियान सिर्फ कागजों में ही सिमट जाता है।- बिहारी बिंद
सिर्फ शहरी क्षेत्रों में ही दवा का छिड़काव कराया जा रहा है। ग्रामीण इलाकों में भी लोग रहते हैं, इसको लेकर किसी कोई ध्यान ही नहीं है। जागरूकता को लेकर कोई सार्थक कदम भी नहीं उठाया जा रहा है।- हाकिम