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Ghazipur News: 420 करोड़ के पुल पर नहीं हो रहा एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन

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गंगा पर 420 करोड़ रुपये की लागत से रेल सह रोड ब्रिज का निर्माण कराया गया है। निर्माण होने के 11 महीने बाद भी रेल ब्रिज पर एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन नहीं हो पा रहा है। ऐसे में इसका पूरा लाभ जिले के लोगों को नहीं मिल पा रहा है।
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जब गंगा पर रेल सह रोड ब्रिज का निर्माण हुआ तो लोगों में उम्मीद जगी थी कि अब एक्सप्रेस ट्रेनों से यात्रा की सुविधा मिलेगी लेकिन अब तक लोगों के हाथ निराशा ही लगी है। वाराणसी-छपरा रेलखंड को देश के मुख्य रेल रूट दिल्ली-हावड़ा से जोड़ने के लिए गंगा पर रेल सह रोड ब्रिज का निर्माण किया गया था। लोगों की दशकों से चली आ रही मांग पूरी करने के लिए इसका निर्माण कार्यदायी संस्था आरवीएनएल (रेल विकास निगम लिमिटेड) की ओर से किया गया था। वर्ष 2024 के 10 मार्च को प्रधानमंत्री ने वॅर्चुअल तरीके से रेल सह रोड ब्रिज का लोकार्पण किया था। उद्घाटन के बाद रेल ब्रिज पर एक पैसेंजर और एक मेमू ट्रेन का संचालन सिटी रेलवे स्टेशन से दिलदारनगर जंक्शन तक किया जा रहा है। पूर्वोत्तर रेलवे वाराणसी मंडल के जनसंपर्क अधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि ट्रेनों को चलाने का निर्णय रेलवे बोर्ड का नीतिगत फैसला होता है।
रेल सह रोड ब्रिज के निर्माण के समय दावा किया गया था कि इसका निर्माण होने से जनपद के लोग दानापुर रेल खंड के मुगलसराय, पटना, आरा समेत पश्चिम बंगाल तक यात्रा कर सकेंगे। लेकिन, अब तक यह सपना पूरा होता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है। जब तक एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन रेल ब्रिज पर नहीं होगा, तब तक लोगों के सपने को
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गंगा पर रेल सह रोड ब्रिज का निर्माण ताड़ीघाट-मऊ प्रोजेक्ट के तहत हुआ है। इसकी आधारशिला 14 नवंबर 2016 को नौ वर्ष पूर्व रखी गई थी। इसकी क्षमता 100 टन भार की है। यह 14 पिलरों पर टिका है। इसमें 52 स्पैरिकल बेयरिंग लगे हैं। इसकी चौड़ाई 16.100 मीटर है। इसके निर्माण में 86 हजार मीट्रिक टन बोल्डर का प्रयोग हुआ है। प्रदेश का यह इकलौता पुल है, जिसका निर्माण नट-बोल्ट पर हुआ है। दूसरी तरफ लोगों का कहना है कि एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन होने से महानगरों और गैर प्रांतों तक जनपद की कनेक्टिविटी हो जाएगी। इसका सीधा लाभ व्यापारियों और किसानों को मिलेगा।
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