मौसम के मिजाज से कोई हैरान है। कभी सूर्यदेव की कृपा लोगों को राहत दे रही
है तो बदली के बीच गलन और सर्द हवाएं लोगों को कंपा दे रही है।
लगातार दो
दिनों तक निकली धूप से जहां ठंड थोड़ी नरम हुई थी, वहीं सोमवार को पूरे
दिन बदली के बीच बर्फीली हवाओं ने लोगों का शरीर पूरी तरह से शून्य कर
दिया। हर कोई ठंड के सितम की दुहाई देता रहा।
इस वर्ष दिसंबर से ही ठंड
ने लोगों की हालत खराब कर दी है। इस बीच कभी कड़ाके की ठंड पड़ी तो कभी धूप
ने थोड़ी राहत दी। इस दौरान तीन दिनों तक रुक-रुककर बारिश भी हुई। शनिवार
और रविवार को धूप निकलने से लोगों को ठंड से काफी राहत मिली, लोगों ने सोचा
कि अब ठंड का प्रभाव धीरे-धीरे कम हो जाएगा, लेकिन सोमवार को फिर से मौसम
बेपटरी हो गया।
पूरे दिन बदली छाई रही। इस दौरान चल रही बर्फीली हवा से हर
कोई कांप गया। मार्गों पर आवागमन कर रहे लोग गलन से ठिठुरते रहे। गलन का
प्रभाव इतना अधिक था कि पहने हुए कपड़े भी गीले लग रहे थे। रेलवे और बस
स्टैंडों पर बैठे यात्री शरीर को पूरी तरह से गर्म कपड़ों से ढंकने के बाद
कांपते रहे।
स्टैंडों पर अलाव की व्यवस्था न होना यात्रियों को खलता रहा।
मार्गोँ पर आवागमन करने वालों की जैसे ही जल रहे अलाव पर नजर पड़ रहा थी,
वह रुककर इसका सहारा लेने लग रहे थे। जिन लोगों का काम बाहर निकले बगैर ही
चल गया वे पूरे दिन घर में दुबके रहे।
ठिठुरते हुए स्कूल पहुंचे बच्चे
सोमवार
को जिले में गलन का जबरदस्त प्रभाव था। ऐसे में सूरज की नाराजगी ने ठंड को
और भी बलवान बना दिया। सुबह गर्म कपड़ों से लैस होने के बाद भी बच्चे
कंपकंपी के बीच हिलते-डुलते हुए स्कूल पहुंचे। स्कूल भेजते समय उनके
अभिभावक इस बात से चिंतित थे कि कहीं उनके लाल को ठंड की नजर न लग जाए।