पर्यावरण: जमानिया विकास खंड के सबलपुर बांड में लगाए गए पौधों के सुरक्षा का सच।
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गाजीपुर/जमानिया। तेजी के साथ बिगड़ रहे पर्यावरण की दिशा और दशा बदलने में जुटी केंद्र और राज्य सरकार की पौधरोपण का सच जिले में काफी चिंताजनक है। अगर समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो वह दिन दूर नहीं जब दूसरे महानगरों की तर्ज पर जिले में लोगों के लिए सांस लेना भी मुश्किल हो जाएगा।
देखा जाए तो कागजों में वन विभाग द्वारा जिले के शहरी और ग्रामीण इलाकों में हर साल करोड़ों खर्च से पौधरोपण तो कराया जा रहा है, लेकिन मौके पर मात्र 25 से 30 फीसदी पौधों की सुरक्षा ही सुनिश्चित नहीं हो पाती है। ऐसा हरे पौधों की देखरेख और सुरक्षा न होने से आ रही है। नियमत: तीन साल के भीतर जिन स्थानों पर पौधों का अस्तित्व समाप्त हो जाता है, वहां नए सिरे से पौधरोपण करना चाहिए लेकिन विभाग के बार-बार प्रयास के बाद भी सड़कों के किनारे और अन्य महत्वपूर्ण स्थलों पर पौधे बढ़कर वृक्ष का रूप नहीं ले पाते। इस संबंध में अधिकारियों का कहना है कि पौधों को लगाने के साथ ही उनकी सुरक्षा के लिए बंदोबस्त करने की जरूरत है। जिस पर विभाग लगातार काम कर रहा है। गाजीपुर के जमानिया तहसील क्षेत्रों में सरकार द्वारा लगाए जा रहे पौधे अपनी शुरूआती संख्या के अनुसार कहीं नजर नहीं आ रहे हैं। जमानिया क्षेत्र में देखरेख और सुरक्षा के अभाव में हरियाली के मंसुबे पर पानी फिरने लगा है। देखा जाए तो इस इलाके में पिछले वर्ष करीब 92 हजार 500 सौ पौधे लगाये गए। वहीं इस वित्तीय वर्ष में अभी तक एक लाख 61 हजार 700 पौधे लगाने के दावे किए जा रहे हैं। इसके अलावा दो लाख 18 हजार पौधे ग्राम पंचयतों में दिया गया। जिसमें जमानिया विकास खंड में एक लाख 34 हजार रेवतीपुर और भैदारा में 57 हजार 316 पौधे दिये गये थे। प्रत्येक ग्राम पंचायत में 1240 सरिफा अर्जुन, सहजन सिसम सागौन अमड़ा आदि पौधे दिए गए। लेकिन इन पौधों की संतोषजनक हरियाली क्षेत्र के किसी भी गांव या कस्बे में नजर नहीं आ रहा है। विभाग अपने तरफ से पूरा प्रयास कर रहा है कि क्षेत्र में पेड़ों की संख्या बढ़े। बावजूद इसके कहीं न कहीं शासन प्रशासन की पौधों के संरक्षण की योजना में कमी की वजह से यह धरातल पर नहीं दिखाई दे रहा है। वन विभाग की ओर से शिक्षा विभाग को सागौन के 2100 पौधे कंजी, सिसम आदि के पौधे हजारों में दिए गए। कृषि विभाग को 15000 पौधे अर्जुन सागौन, सिसम आदि के दिए गए हैं। कागजों में इन पौधों का संरक्षण सहित हर- भरा दिखाने में भी कोई कोर-कसर नहीं छोड़ा गया। लेकिन हकीकत यह है कि लगाए गए अधिकतर पौधे सिंचाई और सुरक्षा के अभाव में सूूख गए। कुछ पौधे आवारा पशुओं के निवाला बन चुके हैं। इलाके के किसी भी जगह पर विभाग की ओर से ट्री गार्ड नहीं बनाए गए।