शहर के तुलसीया का पुल मोहल्ले में नाले पर अतिक्रमण कर रखा दुकान का सामान। संवाद
गाजीपुर। शहर में जल निकासी के लिए बनाए गए नाला और नालियों पर अतिक्रमण जलभराव का कारण बन रहा है। लोगों के नालों पर रैंप और पक्का निर्माण कर कब्जा कर लेने से मानसून के समय पानी की निकासी रुक जाती है और गलियों एवं मुख्य सड़कों पर गंदा पानी भर जाता है।
शहर में नगर पालिका क्षेत्र अंतर्गत 25 वार्ड हैं। इन वार्डों में छोटे एवं बड़े कुल 80 नाले हैं। इनमें 23 बड़े एवं 57 छोटे नाले हैं। कुछ मुहल्लों एवं बाजारों में लोगों ने अपने मकानों या दुकानों के सामने बनी नाली पर अस्थायी निर्माण कर लिया है।
कुछ ने उसे सीमेंट से ढककर अपने वाहन खड़े करने की जगह बना ली, तो कुछ ने वहां दुकानें बढ़ा लीं। अवैध कब्जों के कारण नाली-नालों की चौड़ाई काफी कम हो गई है। यह समस्या केवल कुछ क्षेत्रों तक सीमित नहीं, बल्कि शहर में कई जगहों पर है।
पक्की स्लैब एवं प्लास्टर कराकर बंद किए गए नाली-नालों की सफाई नहीं हो पा रही है। गंदगी से पटे नालों के यह हिस्से अवरुद्ध होने से बारिश में उनके उफनाने के कारण मुहल्ले-सड़क पर जलभराव होता है। अब जब बरसात का मौसम आएगा, तो बारिश का पानी कहां जाएगा।
जल निकासी के लिए बनाए गए नाली-नाले अवरुद्ध होंगे। वहां सफाई नहीं हो पाएगी ऐसे में बारिश का पानी गलियों और सड़कों पर बहने लगेगा। इससे लोगों को जलभराव की समस्या झेलनी पड़ेगी। बारिश का पानी सड़कों पर बहने से यातायात बाधित होगा और नागरिकों को असुविधा का सामना करना पड़ेगा। नगर पालिका प्रशासन की तरफ सेे नाले-नालियों पर किए गए अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाया जाता है लेकिन इसका असर ज्यादा दिनों तक दिखाई नहीं देता। जैसे-जैसे समय बीतता जाता है अतिक्रमणकारी फिर से सीढ़ी-रैंप आदि का निर्माण कर लेते हैं। लोगों की शिकायत के बाद भी समस्या का समाधान नहीं कराया जा रहा है।
शहर के तुलसीया का पुल मोहल्ले में नाले पर अतिक्रमण कर रखा दुकान का सामान। संवाद