आम जनता के ऊपर बिजली का बिल बकाया होने पर उसकी बिजली काट दी जाती है। वसूली के लिए आरसी भी भेजा जाता है, यही नहीं उपभोक्ताओं को सार्वजनिक रूप से बेइज्जत तक किया जाता है। लेकिन सरकारी विभागों पर बिजली विभाग का कोई जोर नहीं चलता। 84 करोड़, 86 लाख, 9366 रुपये बकाए होने पर भी सरकारी विभागों के न केवल बिजली और पंखे चल रहे हैं, बल्कि एसी और कूलर विभाग के कर्मचारियों तथा अधिकारियों को ठंडक पहुंचा रहे हैं। सरकारी विभागों पर बकाए की वसूली पर बिजली विभाग के अधिकारियों का सिर्फ इतना कहना होता है कि बकाए बिल के लिए नोटिस भेजी गई है। इस नोटिस का कितना असर होता है यह न बकाएदार बताता है और बिजली विभाग।
जिले में बिजली बिल बकाए को लेकर पिछले कई महीने से वसूली अभियान चल रहा है। नगर तथा ग्रामीण क्षेत्रों में चेकिंग के दौरान बिल जमा न करने पर बकाएदारों के कनेक्शन तक काटे जा रहे हैं। जगह-जगह वसूूली कैंप भी लगाए जा रहे हैं। नगर में एक हफ्ते पहले ही टीम ने बकाएदारों से वसूली की कार्रवाई की थी। लेकिन सरकारी विभागों पर विद्युत बिल का बकाया होने के बाद भी विभाग चुप्पी साधे हुए है।
मार्च 2016 तक के बकाए पर एक नजर डालें तो सबसे बड़े बकाएदार के रूप में स्वास्थ्य महकमा है। इस पर कुल तीन करोड़, 32 लाख, 26 हजार 101 रुपये का बकाया है। दूसरे नंबर पर शिक्षा विभाग है। जिस पर कुल दो करोड़ आठ लाख 45 हजार 783 रुपये का बकाया है। इसी प्रकार पुलिस विभाग पर एक करोड़, नौ लाख, 86 हजार 274 रुपये का बकाया है। राजस्व विभाग पर 36 लाख, 97 हजार 843 रुपये, पीडब्लूडी विभाग पर 50 लाख, 85 हजार 287 रुपये, न्याय विभाग पर 34 लाख, 13 हजार 382 रुपये, खंड विकास अधिकारी पर कुल 46 लाख, 53 हजार 289 रुपये, पशु पालन विभाग पर 12 लाख, 15 हजार 186 रुपये, अधिशासी अभियंता व जल निगम पर 16 लाख, 11 हजार 71 रुपये तथा सेवायोजन कार्यालय पर एक लाख 35 हजार 150 रुपये का बकाया है। अब देखना है कि इन विभागों को नोटिस भेेजने की कागजी कार्रवाई ही की जाएगी अथवा इनके कनेक्शन भी काटे जाएंगे। फिलहाल सरकारी विभागों के बिल का भुगतान कब तक होगा यह बता पाना काफी मुश्किल है।