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चुनाव लड़ने की बजाय अब समर्थकों के लिए मांगेंगे वोट

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मुहम्मदाबाद/बिरनो। पंचायत चुनाव के मद्देनजर प्रधान, क्षेत्र व जिला पंचायत सदस्य पद के आरक्षण की अनंतिम सूची जारी हो गई है। आरक्षण सूची जारी होने के साथ ही गांवों में चुनावी सरगर्मी भी बढ़ गई है। उधर, अनंतिम आरक्षण सूची जारी होने के कारण इस बार मुहम्मदाबाद ब्लाक क्षेत्र की कई बड़ी ग्राम पंचायतों की बागडोर दूसरे आरक्षित वर्ग के लोगों के हाथों में होने की उम्मीद है। सामान्य वर्ग के लोगों के कब्जे में वर्षों से रहे कई ग्राम पंचायतों में प्रधान के पद आरक्षित हो जाने से अब उन्हें पांच वर्ष तक इंतजार करना पड़ सकता है। प्रधान का पद आरक्षित होने के चलते वह चुनाव लड़न की बजाय अब अपने समर्थक दावेदारों के लिए वोट मांगेंगे।आरक्षण की अनंतिम सूची जारी होने के बाद कई गांवों में प्रधान के पद जिस जाति-वर्ग के लिए आरक्षित हैं, उस वर्ग के लोगों के गांव में न होने के कारण प्रधान पद पर नामांकन करने वाले ही नहीं मिल सकेंगे। कुछ गांवों में आरक्षित वर्ग के एक दो परिवार ही होने के कारण उनकी लाटरी निकल गई है। शेरपुर ग्राम पंचायत में प्रधान पद पर अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों का कब्जा होगा। इसके पूर्व एक बार ओबीसी के अलावा हमेशा सामान्य जाति के ही पुरुष या महिला ग्राम प्रधान रहे हैं। इसी प्रकार राजापुर, कुंडेसर, परसा, हाटा, टड़वा आदि गांवों में प्रधान पद पर ज्यादातर सामान्य जाति वर्ग के लोग ही काबिज रहे हैं, लेकिन इस बार इन गांवों में प्रधान का पद आरक्षित श्रेणी में आने के चलते सामान्य जाति वर्ग के लोग चुनाव लड़ने की बजाय अब अपने समर्थकों के लिए वोट मांगेंगे। अनंतिम आरक्षण सूची में कई विसंगतियां भी देखने को मिली हैं। जिस पर आपत्ति दाखिल करने की तैयारी चल रही है। हाटा गांव अनुसूचित जनजाति की महिला के लिए आरक्षित किया गया है। जातिगत जनगणना में गांव में खरवार एवं गोड़ जाति की अनुसूचित जनजाति में गणना की गई थी, जिसके आधार पर यह गांव अनुसूचित जनजाति की महिला के लिए आरक्षित कर दिया गया। लेकिन वर्तमान में तहसील क्षेत्र के खरवार एवं गोड़ जाति को जनजाति का न मानते हुए उन्हें जाति प्रमाणपत्र जारी नहीं किया जा रहा है। उन्हें ओबीसी का जाति प्रमाणपत्र मिल रहा है। इसी प्रकार आसमानी चक उर्फ मालीचक पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित है, जबकि उस गांव में ओबीसी का एक भी परिवार नहीं है। बिरनो ब्लाक में भी आरक्षण में विसंगति सामने आई है। ब्लाक क्षेत्र में ग्राम पंचायत के प्रधान पद की 56 सीटें हैं। इनमें 32 सीटें आरक्षित कर दी गई हैं। अनंतिम सूची में अनुसूचित जनजाति स्त्री एवं अनुसूचित जनजाति एक-एक, अनुसूचित जाति पांच, अनुसूचित जाति नौ, पिछड़ा वर्ग स्त्री छह तथा पिछड़ा वर्ग के लिए दस पद आरक्षित हैं। इस संबंध में खरगपुर बिठौरा गांव के पूर्व प्रधान लल्लन सिंह का कहना है कि 28 सीटों पर आरक्षण होना चाहिए, जबकि 32 सीटें आरक्षित कर दी गई हैं। उन्होंने इस विसंगति को दूर करने की मांग की।
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