- एक वाहन में एक पशु चिकित्सक, एक टेक्निशियन और एक चालक की तैनाती होगी
- वाहनों के लिए 1962 टोल फ्री नंबर मुहैया
- जनपद में कुल 8,92218 गोवंशों के इलाज और कैंप पर निगरानी रखेगा लखनऊ
- 20 जनवरी से 31 मार्च तक अभियान के दौरान करीब चार हजार पशुओं को पकड़ा गया
संवाद न्यूज एजेंसी
गाजीपुर। जनपद में कुल 8,92218 गोवंशों के इलाज और रख-रखाव को लेकर शासन-प्रशासन की ओर से तमाम कवायद की जा रही है। समय-समय पर अभियान चलाकर छुट्टा पशुओं को गो आश्रय स्थल भेजने के साथ उनके खाने-पीने और रहने का इंतजाम किया जाता है। पशुपालन विभाग की ओर से 20 जनवरी से 31 मार्च तक छुट्टा पशुओं को लेकर अभियान चलाया गया। दावा किया जा रहा है कि इस दौरान करीब चार हजार पशुओं को गो आश्रय स्थल भेजा गया है। इसी कड़ी में अब शासन की ओर से पशु पालन विभाग को आठ मोबाइल वेटनरी यूनिट (वाहन) उपलब्ध कराया गया है। हरेक वाहन तहसीलवार को उपलब्ध कराया जाएगा।
एक वाहन में एक पशु चिकित्सक, एक टेक्निशियन और एक चालक की तैनाती होगी। साथ ही वाहनों में जीपीएस भी लगे होंगे। जिनको हर समय ट्रैक किया जा सकेगा। ये लखनऊ से सीधे संचालित होंगे। शासन ने इन वाहनों के लिए 1962 टोल फ्री नंबर मुहैया कराया है। जिस नंबर पर कहीं से कोई भी व्यक्ति छुट्टा पशु सहित बीमारी और अपने गांव में कैंप के संबंध में जानकारी ले सकता है।
वहीं, पशुपालन विभाग वाहनों में से आधे को जनपद के प्रमुख रूटों पर तैनात करेगा। जो अपने तीन किमी के दायरे में सेवा प्रदान करेंगी। सुबह आठ से दोपहर 2 बजे तक ट्रीटमैंट और कैंप की सुविधा ली जाएगी। साथ ही 10 बजे से शाम आठ बजे तक इमरजेंसी सुविधा का संचालन होगा। देवकली ब्लॉक क्षेत्र में सबसे अधिक पशु होने से पशुपालन विभाग एक वाहन वहां भी लगाएगा। ऐसे ही निकायों की ओर से भी वाहनों की अलग व्यवस्था की गई है। जिसमें चार ब्लॉक, चार नगर पंचायत और दो वाहन जिला पंचायत के हैं। इस तरह कुल 10 वाहन इनके भी है।
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आउटसोर्सिंग के जरिए रखे जाएंगे चिकित्सक और चालक
मोबाइल वेटनरी यूनिट में तैनात चिकित्सक, टेक्निशियन और चालक को आउटसोर्सिंग के जरिए रखा जाएगा। जिसमें चिकित्सक को 56 हजार रुपये, टेक्निशियन को 20 हजार और चालक को 18 हजार रुपये वेतन दिया जाएगा।
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अभियान के दौरान लक्ष्य पूरा करने का दावा
जिले में पांच स्थायी और 52 अस्थाई गो-आश्रय स्थल है। 20 जनवरी से 31 मार्च तक करीब चार हजार छुट्टा पशुओं को गो-आश्रय स्थल भेजा गया है। मरदह ब्लाक के कुछ 63 गांव में घूम रहे 212 छुट्टा गोवंशों को अभियान चलाकर गो-आश्रय स्थल भेजा गया था। जिसमे गो-आश्रय स्थल करीमुद्दीनपुर में 90, कर्महरी में 57, सिंगेरा में 65 गोवंश संरक्षित किया गया। ऐसे ही नगर पंचायत क्षेत्र सैदपुर स्थित गो आश्रय केंद्र जोहर गंज में अभियान से पूर्व 165 गोवंश संरक्षित रहे हैं। यह संख्या 205 पहुंच गई है। सैदपुर नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी आशुतोष त्रिपाठी ने बताया कि शासन के निर्देश का अनुपालन में लगातार छुट्टा गोवंशों को पकड़ा जा रहा है। जमानिया तहसील क्षेत्र में जनवरी से मार्च तक 55 गोवंशों को पकड़ा गया है। वही पशु चिकित्सा अधिकारी जमानियां डा. सुशील कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि विकास खंड स्तर से करीब 118 पकड़े गये है। 50 नगर और 106 का लक्ष्य ग्रामीण इलाके के लिए आया था। जो पूरा हो गया है, लेकिन अभी भी कई गो वंश क्षेत्र में है।
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सड़कों पर पशुओं का झुंड कायम
बारा। छुट्टा मवेशियों को पकड़ कर गो आश्रय स्थल में भेजे जाने के बाद भी इनसे निजात नहीं मिल सकी है। आए दीन झुंड में छुट्टा मवेशी सड़क पर घूमते नजर आते हैं जिससे हादसों का अंदेशा बना रहता है। ये मवेशी हमला कर लोगों को घायल भी कर देते हैं। छुट्टा मवेशियों के हमले से कई लोग घायल भी हो चुके हैं। वहीं, मुख्य सड़कों पर मवेशियों का जमावड़ा लगा रहने से वाहन चालकों सहित राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नेशनल हाइवे 124 - सी पर गहमर, करहिया में छुट्टा मवेशियों का आतंक है। सड़क के बीच छुट्टा मवेशियों का पूरा झुंड नजर आता है। अक्सर छुट्टा मवेशी लड़ते हैं जिससे राहगीरों को हादसे का अंदेशा बना रहता है।
00 गोवंशों के संरक्षण और संवर्धन के लिए अभियान चलाकर कार्य किया जा रहा है। शासन की ओर से जनपद को आठ मोबाइल वेटनरी यूनिट उपलब्ध कराई गई है। जिसका संचालन जल्द शुरू हो जाएगा।
डा. एस के रावत, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी