कटान के क्रम थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार की रात से सोकनी, बड़हरिया और रफीपुर में कटान का जो क्रम शुरु हुआ, वह दूसरे दिन गुरुवार को भी रुक-रुककर जारी रहा। इस दौरान 24 से अधिक किसानों की आठ बीघा कृषि योग्य भूमि कटकर गंगा में समाहित हो गई।
अगर कटान का कहर इसी तरह से जारी रहा तो आने वाले दिनों में करीब एक दर्जन मकान भी गंगा में समाहित हो सकते है। इससे इन मकानों में रहने वालों में दहशत व्याप्त है। जान है तो जहान है की सोच रखते हुए वे अपना सामान समेटना शुरु कर दिए गए।
करंडा क्षेत्र के लिए कटान कोई नई बात नहीं है। वर्षों से कई गांव के लोग कटान के दंश झेल रहे है। इस वर्ष भी गंगा के जलस्तर में वृद्धि होते ही कटान का सिलसिला भी शुरु हो गया था। हालांकि कुछ दिनों से कटान थमा था। इसी बीच बुधवार की रात से सोकनी, बड़हरिया और रफीपुर में कटान शुरु हो गया।
दूसरे दिन गुरुवार तक इन गांवों के राजनारायण यादव, ओमप्रकाश यादव, छेदी यादव, तेजनारायण यादव, सुदामा यादव, आजाद यादव, कपिलदेव यादव, लक्ष्मण यादव, कमलेश सिंह, राजेश सिंह, योगेश सिंह, मुन्ना सिंह, रामअवतार सिंह, घनश्याम सिंह, कृष्णा सिंह, राधेश्याम सिंह, विनोद सिंह, रामपूजन सिंह, शिवपूजन सिंह, रामकमार सिंह, कुबेर सिंह आदि की आठ बीघा कृषि योग्य भूमि कटकर गंगा में समाहित हो गई।
गंगा मइया भूमि को काटते हुुए तेजी से बड़हरिया और रफीपुर गांव की तरफ बढ़ रही है। अगर कटान काय कहर नहीं रुका तो इन दोनों गांव करीब एक दर्जन मकान गंगा में समाहित हो जाएंगे। इसको लेकर इयन मकानों में रहने वालों के होश उड़ गए है। ऐसे लोगों ने सामानों को समेटना शुरु कर दिया है।
कटान पीड़ितों ने बताया कि कुछ दिन पहले मौके पर पहुंचे डीएम संजय खत्री ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों निर्देश दिया था कि कटान रोकने का जो भी संभव उपाय हो, फिलहाल किया जाए, जिससे नुकसान कम हो, लेकिन सिंचाई विभाग ने आज तक कुछ नहीं किया। इससे हम लोग अपनी आंखों के सामने ही गंगा में गिर रही अपनी जमीन को देखते को विवश हैं।