भारतीय समाज में शिक्षा का इतिहास वैदिक कालीन से है। ऋषि एवं मुनियों की ओर से बनाई गई गुरुकुल परंपरा विश्व भर में आदर्श परम्परा मानी गई। अतीत की उपलब्धियों के आधार पर वर्तमान की चुनौतियों का मुकाबला नहीं किया जा
सकता। शिक्षा सामाजिक परिवर्तन का प्रमुख हथियार है। शिक्षा के क्षेत्र में भारत की छवि विश्वगुरु की रही है। उक्त बातें सोमवार को बेहरी डगरा पर उमा पब्लिक स्कूल के वार्षिकोत्सव में बतौर मुख्य अतिथि प्रदेश के पर्यटन मंत्री ओमप्रकाश सिंह ने कही।
विशिष्ट अतिथि आईजी जोन वाराणसी अमरेंद्र सिंह सेंगर ने कहा कि वर्तमान परिवेश में शिक्षा का स्वरूप बदला है। माइक्रोटीचिंग, टेलीविजन टीचिंग, रेडियो टीचिंग से होती पढ़ाई के बाद भी मूल मुद्दा व्यक्ति को मानवीय ज्ञान से है।
भविष्य चुनौती लेकर खड़ा है। स्कूल के चेयरमैन रामगोपाल सिंह ने कहा कि ग्रामीण अंचल में शिक्षा संस्थानों को खोलकर समाजसेवा की जा सकती है। प्रधानाचार्या तृप्ति तिवारी ने आगंतुकों का स्वागत किया। गंगा प्रदूषण एवं
निवारण को लेकर प्रस्तुत नाटक की भावपूर्ण प्रस्तुति सराही गई। इस मौके पर पुलिस अधीक्षक राजकिशोर, सानंद सिंह, सपा नेता राजेश राय पप्पू, देवराज सिंह ठाकुर, पारस मिश्रा, प्रमुख उद्यमी शिवचरन दास जासवाल, ब्रजेश सिंह,
गौरव सिंह, राज बहादुर यादव आदि मौजूद रहे। संचालन देवाशीष राय एवं आभार निदेशक अतुल सिंह ने किया।