महापंडित रावण को लोग बुराई का भी प्रतीक मानते हैं। आज से नौ वर्ष पहले तक लंका मैदान में उसके पुतले पर पत्थर भी फेंकते थे। लेकिन, अब उसी रावण के पुतले की राख को लेने के लिए बहुत से लोग परेशान दिखते हैं। यही नहीं, जो उसके पुतले की राख को जो पा जाते हैं, वो उसे शुभ मानते हुए घर ले जाते हैं और वर्षभर रखते थे। इसके बाद अगले वर्ष उसे गंगा में प्रवाहित करते हैं। हालांकि इसके पीछे की पौराणिक मान्यताएं भी हैं। हैरत की बात तो यह ऐसा करने वालों में संपन्न घराने के भी लोग शामिल होते हैं।
काशी की तर्ज पर 450 वर्षों से लहुरी काशी में भी रामलीला का भावपूर्ण मंचन हो रहा है। चलित रामलीला के चलते इसकी अपनी अलग पहचान है। मंचन के दौरान विजया दशमी के दिन 24 अक्तूबर को लंका मैदान में दशानन का 60 फीट ऊंचा जलाया जाएगा, जिसके लिए 45 दिन से ही तैयारी चल रही है।
दशानन के पुतले के जलने से पहले वर्ष 2014 तक लोग पत्थर भी मारते थे। लेकिन, अति प्राचीन रामलीला कमेटी हरिशंकरी ने लोगों लोगों से अपील कराकर इसे बंद करा दिया है। कमेटी के महामंत्री ओम प्रकाश तिवारी बताते हैं कि पत्थर शैतान को मारा जाता है। जबकि हिंदू धर्म के अनुसार रावण का दहन किया जाता है। हालांकि लोग अभी रावण के जले हुए पुतले से निकले राख के लिए परेशान होते हैं।
लोगों का मानना है कि इसके पीछे पौराणिक महत्व है। कमेटी के महामंत्री बताते हैं कि रावण ने लक्ष्मी,इंद्र, कुबेर, पवन जैसे देवताओं कैद कर रखा था, जो रावण की मौत के साथ ही आजाद हुए थे। इसके चलते लोगों का मानना है कि रावण का पुतला कई मायनों में शुभ माना जाता है। लोग रात आठ बजे पुतला जलते ही राख लेने के लिए धक्का-मुक्की करते हैं, क्योंकि आधे घंटे के अंदर राख खत्म हो जाती है।
इस राख को लेने वालों में शहर के कई संभ्रातजन भी शामिल होते हैं। बताते हैं कि राख को लोग लाल कपड़े में बांधकर अपने घर या दुकान के बाहर वर्षभर टांगे रहते हैं। ऐसा करने वाले लोगों का मानना होता है कि इससे दुकान या घर में नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश नहीं कर पाती है। वहीं,अग,ले वर्ष लोग इस राख को गंगा में प्रवाहित करते हैं और फिर रावण के पुतला जलाने पर निकलने वाली राख को लेकर टांग देते हैं।
पाठ बोलेगा रावण का पुतला, नाभी में भरा होगा बारूद
रावण के पुतले की नाभी में बारूद भरा होगा, जिसे हीटर के ऊपर रखा जाएगा। इस हीटर को रिमोट से लिंक किया जाएगा,जिसके दबाते ही हीटर गर्म और बारुद से आग लग जाएगी, जिससे रावण के पुतले का दहन होगा। लेकिन, इसके पहले रावण के पुतला से अट्टहास की आवाज सुनाई देगी और फिर आवाज आएगी कि दोनों तपस्वियों ने सोच लिया है, सोने की लंका जो वीरों की खान थी वो खाली हो चुकी है। ऐसा कदापि नहीं, क्योंकि त्रिलोक विजेता लंका पति रावण अभी जिंदा है। हाहाहाहा....। इस आवाज के लिए कमेटी ने पुतले में स्पीकर लगवाया है और उसे मंच पर लगे मुख्य कनेक्शन से जोड़ा जाएगा।