जिला जेल की खामोशी जन्माष्टमी पर्व पर आयोजित भोजपुरी गीत कार्यक्रम के दौरान टूट गई। इस मौके पर भोजपुरी गायक कलाकारों ने एक से बढ़कर एक गीत प्रस्तुत कर बंदियों को झुमाते हुए उनके मन से कुछ पल के लिए ही सहीं निकाल दिया कि वह जेल की ऊंची दीवारों के अंदर कैद हैं।
जन्माष्टमी के मौके पर जिला जेल में भोजपुरी गायन कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। शनिवार की सुबह 11 बजे कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही सभी बंदी अपने-अपनेे बैरकों से निकलकर जेल परिसर में आकर बैठ गए। जैसे ही भोजपुरी गायक गोपाल राय ने यह गीत प्रस्तुत किया कि बाबू मत बोला ई बड़का घराना ह, इनके हथवे में जिला अऊर थाना ह...पर बंदी तालियां बजाते हुए झूमने लगे। इसके बाद गायक कलाकार दीपक कुमार ने माइक पकड़ा और जैसे ही उन्होंने गीत प्रस्तुत किया कइले बा जूलुम तोहरे नाक क नथुनिया, बंदी अपने आप रोक न सके और खड़े होकर ठुमका लगाने लगे। दोबारा फिर से स्टेज पर गोपाल राय को आमंत्रित किया। इन्होंने अपनी आवाज का जादू बिखेरत हुए जैसे ही यह गीत शुरू किया कि चौबे क पतोहिया ससुर अऊर भसुर से लजात नइखे, बंदी ठहाका लगाते हुए गायक से सुर में सुर मिलाकर तालियां बजाने लगे। गायक कलाकार एक से बढ़कर एक भोजपुरी गीत प्रस्तुत करते रहे और उत्साह से लबरेज बंदी पुरस्कारों की बौछार करते रहे। इस अवसर पर मुख्य अतिथि सीएमओ डा. एमपी सिंह, जेलर एसपी त्रिपाठी, डिप्टी जेलर विनय प्रताप सिंह, डिप्टी जेलर राजकुमार वर्मा मौजूद रहे।
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