जिले के वरिष्ठ समाजसेवी सदानंद तिवारी (75) का बीते तीन मई को आकस्मिक निधन हो गया। श्री तिवारी ने करीब चार साल पहले बीएचयू को अपनी देहदान कर दी थी, लेकिन लाकडाउन के चलते उनकी इच्छा पूरी नहीं हो सकी। इससे उनके परिजन भी दुःखी हैं।
जखनियां तहसील के मनिहारी ब्लॉक के धौरहरा गांव निवासी सदानंद तिवारी ने सन 1973 में समाजशास्त्र से परास्नातक (एम्०ए०) व् 1974 में बीएड की शिक्षा ग्रहण की। इसी दौरान कम्युनिष्ट पार्टी के नौजवान सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष बनाये गए। सन 1982 में काम्युनिष्ट पार्टी के अंतराष्ट्रीय प्रेस कांफ्रेंस में सोवियत संघ (रूस) जाकर जनपद का प्रतिनिधित्व किया।
उनके पौत्र आलोक तिवारी "पंकज" ने बताया कि सदानन्द तिवारी ने 19 दिसंबर 2016 को बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के चिकित्सा विज्ञान के छात्रों के शोध के लिए देहदान का संकल्प पत्र भरा था। उन्होंने बताया कि रविवार की सुबह श्री तिवारी के निधन के उपरांत उनकी अंतिम इच्छा के अनुसार काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संबंधित विभागाध्यक्ष से संपर्क साधा गया। लेकिन उन लोगों ने रेड जोन का हवाला देते हुए पार्थिव शरीर लेने में असमर्थता जताई।
सदानंद तिवारी की पहचान सच्चे कामरेड व पूर्व सांसद सरजू पांडेय के अनन्य सहयोगी के रूप में होती रही है। वह फिलहाल कुछ वर्षों से बहुजन समाज पार्टी की राजनीति कर रहे थे। सन 1998 में बहुजन समाज पार्टी में शामिल होकर जिला उपाध्यक्ष के साथ वाराणसी मंडल के कोआर्डिनेटर का दायित्व भी निभा चुके थे.