मौधा। सैदपुर विकासखंड के अमेदा गांव में गंवई सियासत चरम पर है। दिसंबर माह में पंचायत का कार्यकाल समाप्त होने को है। पंचायत के रण में दावेदारों ने ताल ठोंकनी शुरू कर दी है। एक तरफ प्रधान पर आरोपों की बौछार है तो दूसरी ओर प्रधान के समर्थक भी पेशबंदी में जुट गए हैं। जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होने से यहां हर समय सबको परेशानी उठानी पड़ती है। मतदाता पुनरीक्षण का कार्य भी अब अंतिम चरण में है। अब ग्राम प्रधान पद के दावेदार लोगों के बीच बुनियादी सुविधाओं का विकास कराने का दावा भी करने लगे हैं। यहां के ददरा गांव में प्राथमिक विद्यालय का मुद्दा जमकर हावी है। बच्चों को पढ़ने के लिये दूसरे गांव लोहषण जाना पड़ता है। वहीं स्वास्थ्य सेवाओं से शून्य इस गांव में एकमात्र एएनएम केंद्र है, जो वर्षों से बंद है। इसका ताला कभी नहीं खुलता है। प्रसव के लिए महिलाओं को अनौनी, खानपुर अथवा सीधे सैदपुर ले जाना पड़ता है। ददरा, गोठौली, ठाटा, बैरिया, सहिचांदपुर आदि मौजे को मिलाकर अमेदा ग्राम पंचायत बना है। यहां लगभग 72 सौ की आबादी है। जबकि मतदाताओं की संख्या लगभग साढे पांच हजार है। ग्रामीणों का कहना है कि इस गांव में विकास कराने को लेकर वर्तमान ग्राम प्रधान ने पूरी तत्परता दिखाई है, लेकिन अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। जिऊली देवगांव मार्ग अमेदा गांव से ही होकर जाता है। इस मार्ग के किनारों पर नाली न बनने से बरसात और घरों से निकला पानी इसी मार्ग पर फैला रहता है। जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होने से यहां हर समय सबको परेशानी उठानी पड़ती है।