लठठूडीह। क्षेत्र के पतार में चल रहे भागवत कथा के चौथे दिन रविवार को कथा वाचक अखिलेश उपाध्याय ने कहा कि हम जीवन में भगवान से मांगते आए हैं। लेकिन, जब हम भगवान को मांग लेते हैं तो हमारे जीवन में कुछ भी शेष नहीं रह जाता। इसलिए हम भगवान से न मांगकर भगवान को मांगे। हमारा जीवन सदा के लिए संवर जाएगा।
उन्होंने वामन देव की कथा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगवान बामन देव जैसे ही राजा बलि के यहां पहुंचे। राजा बलि बामन देव को देखते ही प्रसन्न हो गया। वह अंदर ही अंदर सोचने लगा कि यह सुकुमार बालक हमसे कुछ मांगता। हमसे कुछ कहता तो कितना अच्छा होता। बलि के इस भाव को समझकर भगवान बामन देव तीन पग भूमि की शर्त रखी। जिस पर राजा बलि हंसा और भगवान को उसके इसी हंसी में अहंकार का भाव नजर आया। भगवान ने कहा कि आपको शर्त मंजूर है तो संकल्प लीजिए। संकल्पित होकर राजा बलि भगवान को जैसे ही तीन पग जमीन पर पांव रखने को कहा, भगवान ने अपने विराट रूप से दो पग में बाली के संपूर्ण क्षेत्र को नाप दिया। इसके बाद भगवान वामन देव ने कहा कि बलि अब तुम्हारे पास कुछ नहीं है। बताओ तीसरा पग कहां रखूं, इस पर बलि ने भगवान वामन देव से कहा कि अब तीसरा पग भगवान हमारे माथे पर रख दीजिए। इस प्रकार अपने आपको भगवान के सामने समर्पण कर राजा बलि ने भगवान वामन देव को जीत लिया।