गाजीपुर। मरीजों को बेहतर उपचार दिलाने के लिए सप्ताह के प्रत्येक रविवार को आयोजित मुख्यमंत्री जनआरोग्य मेले में चिकित्सक दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। वार्ड बॉय और फार्मासिस्टों के सहारे ही मरीजों का उपचार कर इतिश्री कर ली जा रही है। अधिकांश स्वास्थ्य केंद्रों पर लोग डॉक्टरों का ही इंतजार करते रह जाते हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती न होने से गंभीर बीमारियों के मरीज मायूस हैं। सर्दी, खांसी, बुखार, रक्तचाप जैसे बीमारी से पीड़ित मरीजों का उपचार कर कागजों पर आंकड़े भर दिए जा रहे हैं। जनपद के 62 स्वास्थ्य उपकेंद्र व न्यू पीएचसी पर सुबह दस बजे से आरोग्य मेले का शुभारंभ तो हुआ, लेकिन बिना जांच के सिर्फ स्वास्थ्य परीक्षण कर दवा दे दी गई। सर्दी, खांसी और बुखार के 500 से अधिक मरीज मेले में पहुंचे। वहीं रक्तचाप के मरीजों की संख्या 110 के आस-पास रही। मधुमेह के 30 मरीजों ने स्वास्थ्य परीक्षण कराया। नंदगंज: न्यू पीएचसी में प्रभारी चिकित्साधिकारी डाॅ. पंकज ने 60 मरीजों के स्वास्थ्य की जांच कर उचित परामर्श एवं दवाओं का वितरण किया। जमानिया: प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर आरोग्य मेले 40 मरीजाें का उपचार केंद्र प्रभारी चिकित्सक डॉ. रवि रंजन ने किया। आरोग्य मेले के नोडल एसीएमओ मनोज सिंह ने बताया कि विशेषज्ञ डॉक्टर भी मेले में पहुंचें, ताकि मरीजों को लाभ मिल सके। इसको लेकर तैयारी चल रही है। मरीजों को जांच की सुविधा दिलाने को लेकर भी ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
केस स्टडी: एक
बिहार सीमा पर स्थित भदौरा ब्लॉक के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर स्थिति बदहाल है। बारा, गहमर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर नर्स और वार्ड बॉय उपचार कर दवाई देते नजर आए। बारा गांव निवासी खालिद खां ने बताया कि जन आरोग्य मेला सिर्फ खानापूर्ति है। जांच की कोई सुविधा नहीं होती है और न ही आवश्यक मशीनें और न ही मेले में कोई विशेषज्ञ चिकित्सक ही पहुंचते हैं।
केस स्टडी- दो
भतौरा गांव निवासी सिंगर चंद्रभान सिंह ने बताया कि समाज के अंतिम पायदान तक स्वास्थ्य सेवाओं को पहुंचाने के लिए रविवार को जन आरोग्य मेला लगाने का दवा किया जाता है। मेले में सिर्फ औपचारिकता निभाई जाती है। जांच के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजा जाता है। जब जांच मेडिकल कॉलेज में कराना है तो इलाज भी हम वहीं से कराए।