शिक्षा विभाग के अधिकारी रसोइया संघ की महिलाओं के धैर्य की परीक्षा न लें। अगर महिलाओं का धैर्य टूटा तो महिला रसोइयों का उत्पीड़न करने वाले अधिकारी चैन की नींद नहीं सो पाएंगे। ये बातें पूर्व ब्लाक प्रमुख चंदा यादव ने नसीरपुर कला गांव में आयोजित रसोइया संघ की बैठक में कहीं।
उन्होंने कहा कि रसोइया महिलाओं की मजदूरी मात्र 30 रुपये प्रतिदिन है। इतनी कम मजदूरी विश्व के किसी कोने में नहीं है। उन्होंने सवाल खड़ा करते हुए कहा कि फिर भारत वर्ष में ऐसा क्यों हो रहा है। यह मातृ शक्ति की प्रतीक महिलाओं के लिए सबसे दुखद बात है। इसकी चिंता संसद व विधान सभा में बैठे माननीय जन प्रतिनिधियों को भी नहीं है। उन्होंने केन्द्र एवं राज्य सरकार से रसोइयों का मानदेय एक हजार से बढ़ाकर छह हजार रुपये प्रतिमाह करने की मांग की। उन्होंने महिलाओं का आह्वान करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि महिलाएं अपने दुश्मनों को पहचानें, मित्रों की पहचान अपने आप हो जाएगी। उन्होंने कहा कि महिलाएं निर्णायक लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं।
जिला रसोइया संघ की जिलाध्यक्ष सुगंती कुशवाहा ने कहा कि गाजीपुर जनपद में महिलाओं का 15 माह का बकाया मानदेय है जिसके कारण रसोइयों के सामने भुखमरी की स्थिति पैदा हो गई है। अवैध ढंग से रसोइयों को निष्कासित किया जा रहा है। उन्होंने प्रतिवर्ष नियुक्ति प्रथा को बन्द करने की मांग की। 20 फरवरी को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय महुआबाग का घेराव करने की घोषणा की। इसके लिए महिलाएं गाजीपुर सीटी स्टेशन पर 10 बजे एकत्र होंगी। बैठक को मीरा, दमयंती, बसंती, कौशल्या, गीता, राधिका, पूनम, परवीन, कमली, उमरावती, आशा, सावित्रि, फुलझरी, महेसी, ज्योती, मंगरी, सावित्री, आदि मौजूद रहीं। रसोइया संध की महासचिव ललिता देबी ने सभी के प्रति आभार जताया।