गाजीपुर। खेतों में किसान पराली न जलाएं क्योंकि सेटेलाइट से इसकी निगरानी की जा रही है। अक्षांश एवं देशांतर के जरिए तहसील ही नहीं ग्राम पंचायतों को चिह्नित कर लखनऊ से तत्काल सूचना जनपद को भेजी जाती है, जिससे तत्काल कार्रवाई हो सके। यहीं नहीं पराली जलाते समय पकड़े जाने पर अर्थदंड के साथ- साथ कृषि विभाग की योजनाओं से भी संबंधित को वंचित कर दिया जाएगा। हालांकि पराली जलाने का मामला जनपद में प्रकाश में नहीं आया है, लेकिन कृषि और राजस्व विभाग की टीम नजर बनाए हुए हैं।
खेतों से धान की क्राप कटिंग किसान पूर्णत: कर चुके हैं। जिन खेतों में किसानों ने मशीन के द्वारा धान की कटाई कराई है, उन खेतों में बची पराली को किसान न जलाने पाए, इसको लेकर ठोस कदम उठाया जा रहा है। सेटेलाइट के जरिए निगरानी शासन स्तर से रखी जा रही है, जिससे पराली जलाने पर उस इलाकों को चिन्हित करके तत्काल जिला कृषि अधिकारी कार्यालय को सूचित किया जाता है। इसके बाद विभाग द्वारा चिन्हित तहसील के विभागीय कर्मियों को सूचित किया जाता है और वह राजस्व टीम के साथ पराली जलाने वाले किसान के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने में जुट जाते हैं।
यहीं नहीं पराली जलाने वाले किसान के खिलाफ अर्थदंड भी लगाया जाता है। विभाग के अनुसार दो एकड़ तक ढाई हजार, दो एकड़ से पांच एकड़ तक पांच हजार और पांच एकड़ से अधिक पर 15 हजार का जुर्माना लगाया जाता है। साथ ही ऐसे किसानों को कृषि विभाग की योजनाओं से वंचित कर दिया जाता है।
अब तक घास एवं जुट्टा जलाने की मिली सूचना
गाजीपुर। कृषि विभाग के अनुसार बीते वर्ष 30 मामले ऐसे सामने आए थे। जहां सड़कों के किनारे घास एवं जुट्टा जलाया गया था। जबकि खेतों में पराली जलाने की सूचना नहीं मिली थी। इसके अलावा इस वर्ष अब तक मिली सात सूचनाओं में सड़क किनारे घास एवं जुट्टा के जलने की ही जानकारी मिली है। हालांकि जहां सड़कों पर घास एवं जुट्टा जलने की सूचना मिली, उस इलाके में कृषि और राजस्व विभाग की टीम सक्रिय हो गई है।
किसान खेतों में पराली न जलाएं। सेटेलाइट द्वारा निगरानी की जा रही है। अब तक जो सूचनाएं मिली है। वहां सड़क किनारे घास एवं जुट्टा जलता पाया गया। पराली जलाने की घटना अब तक नहीं हुई है।- मृत्युंजय सिंह, जिला कृषि अधिकारी गाजीपुर।