गंगा को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए नालों का दूषित जल गिरने से रोका जा रहा है। मगर गाजीपुर में नमामि गंगे की यह कवायद रंग लाती नहीं दिख रही है। शहर के नौ घाटों पर नाले का पानी गंगा में गिरता है, जिससे आसपास का पानी आचमन करने लायक नहीं रह गया है। इनसे गिरने वाले सीवर के चलते श्रद्धालुओं को परेशानी उठानी पड़ती है।
स्वच्छता अभियान के तहत स्थानीय निवासी घाटों की सफाई और उनके सुंदरीकरण के लिए प्रयास कर रहे हैं। मगर गंगा में गिरते नाले उनके इस प्रयास को बेमानी बना दे रहे हैं। शहर में नौ घाटों के पास नाले गिरते हैं। शहर के नालों का निकास गंगा में है। ऐसे में सीवर गंगा में सीधे गंगाजल में मिल रहा है। इन नालों के चलते गंगा घाटों पर बदबू भी फैली रहती है जिससे लोग देर तक गंगातट पर बैठना पसंद नहीं करते हैं।
श्मशानघाट, पोस्ताघाट, चीतनाथ घाट, स्टीमर घाट, गोला घाट, कलेक्टर घाट, ददरीघाट, महदेवा घाट के पास नालों के पानी गंगा में मिलता है। गंगा घाटों की सफाई पर जोर तो दिया जा रहा है लेकिन गंगा को निर्मल और अविरल बनाने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। शहर के पानी का निस्तारण कहीं अन्य करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं बनाई जा सकी है।
शहर में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट नहीं होने के कारण सीवर का पानी बिना शोधन के गंगा में जा रहा है। नगर पालिका प्रशासन ने छावनी लाइन में एसटीपी की स्थापना के लिए करीब दो सौ करोड़ का प्रस्ताव शासन को भेजा है। कुछ माह पहले जापानी एजेंसी जायका की टीम ने एसटीपी स्थल का निरीक्षण किया था लेकिन अभी इसको हरी झंडी नहीं मिल पाई।
शासन ने एसटीपी की डिजाइन बदल दी है। इससे लागत में भी परिवर्तन हुआ है। शासन से मंजूरी मिलते ही एसटीपी का कार्य शुरू हो जाएगा। बगैर एसटीपी के शहर के दूषित पानी का निस्तारण अन्यत्र कराना संभव नहीं है।- विनोद अग्रवाल, अध्यक्ष नगर पालिका