गाजीपुर। लोक आस्था का पर्व डाला छठ महापर्व के पहले अर्घ्य में मात्र 82 घंटे शेष है। बावजूद गंगा घाटों पर गंदगी, तालाबों में काई और नदियों के किनारे कूड़ा मुश्किलें बढ़ाएगा। जबकि यहां पूजन करने को महिलाओं के पहुंचने की संभावना है। यह स्थिति तब है जब जिलाधिकारी आर्यका अखौरी ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिया है। लेकिन पड़ताल करने पर डीएम का यह आदेश-निर्देश कागजों तक ही सीमित दिखता है। वजह साफ-सफाई को लेकर संबंधित विभागों के द्वारा अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका है। यहीं नहीं इस बार सड़क भी व्रतियों की परीक्षा लेने को तैयार है, जगह-जगह क्षतिग्रस्त सड़कों पर चलना लोगों के लिए परेशानी का सबब बनेगा। शहर के स्टीमर घाट, कलेक्ट्रेट घाट, ददरीघाट, चीतनाथघाट, सिकंदरपुर घाट, नवापुरा घाट, महादेवा घाट, अंजही घाट, पत्थर घाट सहित अन्य कच्चे घाटों पर व्रतियों द्वारा वेदियां बनाई जा रही हैं। जबकि स्थिति यह है कि ददरीघाट के दोनों तरफ गंदगी का अंबार लगा हुआ है। वहां कूड़ा-कचरा फेंका पड़ा है। जबकि नालों का गंदा पानी गंगा के पवित्र जलधारा को दूषित कर रही है। यहीं हाल शहर के अन्य घाटों का ही है। सिर्फ कोरमपूर्ति के नाम पर सुबह-शाम झाड़ू लगाकर इतिश्री कर ली जा रही है। जबकि ग्रामीण इलाकों में स्थित तलाबों की स्थिति तो यह है कि काई लगने और जलकुंभी व्रतियों की सूर्य उपासना में बाधक बनेगा। यहीं नहीं शहर सहित तहसील क्षेत्र के ऐसे गंगा घाट जहां तक की सड़क क्षतिग्रस्त हो गई हैं, वहां तक पहुंचने के व्रतियोें को कड़ी मशक्कत का सामना करना पड़ेगा। यहीं नहीं अब तक घाटों पर न तो प्रकाश की व्यवस्था को लेकर ठोस कदम उठाए जा सके हैं और जिन घाटों पर पानी अधिक है, वहां कोई चिन्ह भी नहीं लगाई गई है। ऐसे व्रतियों को दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है।