नगर पालिका अध्यक्ष और अधिशासी अभियंता के बीच स्वकर के मुद्दे पर रार छिड़ गई है। ईओ शासनादेश के तहत काम करने की बात कह रही हैं। वहीं अध्यक्ष इसे नियम विरुद्ध बताते हुए विधिक सलाह लेने की बात कह रही हैं।
चेयरमैन और ईओ में स्वकर के मुद्दे पर शुरू से ही वैचारिक मतभेद है। दोनों जिम्मेदार अपने-अपने हिसाब से कार्य कराना चाह रहे है। वर्तमान समय में सभासद भी दो खेमे में बंट गए हैं। हालांकि संख्या अधिक चेयरमैन के खेमे में है। दोनों जिम्मेदारों की रार के चलते बात नहीं बन पा रही है। छह मार्च को बुलाई गई बैठक बिना किसी निर्णय के ही स्थगित कर दी गई। चेयरमैन ने मार्च में ही बोर्ड की बैठक फिर से कराने को कहा, लेकिन अभी तक कोई तारीख नहीं तय की। इधर, ईओ स्वकर लागू कराने के लिए प्राप्त आपत्तियों को निस्तारण न सिर्फ कर दी, बल्कि स्वकर निर्धारण के सूची का अंतिम प्रकाशन भी कर दी।
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स्वकर की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और शासन के मंशा के अनुरुप हुई है। मैंने लगातार नगर पालिका अध्यक्ष को पत्राचार किया, लेकिन उन्होंने संज्ञान में नहीं लिया। इसके बाद स्वकर का निर्धारण शासनादेश का पालन करते हुए किया है। अध्यक्ष गलत आरोप लगा रही हैं।-अमिता वरुण, ईओ
पहला प्रकाशन ही विधि नियम के खिलाफ है। बोर्ड की बैठक में तय होने के बाद स्वकर के लिए विज्ञापन जारी होना चाहिए था। जबकि ऐसा नहीं हुआ और आपत्तियों को निस्तारित कर दिया गया। जब पहला प्रकाशन ही विधि विरुद्ध हो गया तो आगे की प्रक्रिया कैसे सही मानी जाएगी। मैं आगे की कार्यवाही के लिए विधिक सलाह ले रही हूं। मैं शासनादेश के तहत कार्य कराना चाहती हूं, जबकि ईओ अपने जिद के अनुरुप कार्य कराना चाहती हैं।- सरिता अग्रवाल, नगर पालिका चैयरमैन