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Ghazipur News: पर्यटक डायना की हत्या के दोषी धर्मदेव की शेष सजा माफ, रिहाई के आदेश

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गाजीपुर। 1997 में न्यूजीलैंड की पर्यटक डायना राउटले क्लेयर की हत्या के दोषी धर्मदेव की शेष कारावास की अवधि माफ कर दी गई है। उत्तर प्रदेश शासन के कारागार प्रशासन एवं सुधार अनुभाग-2 ने वाराणसी केंद्रीय कारागार में निरुद्ध सिद्ध दोष बंदी धर्मदेव यादव निवासी ग्राम ब्रिंदावन, थाना बहरियाबाद की रिहाई के आदेश जारी कर दिए हैं। धर्मदेव को वर्ष 2003 में वाराणसी के सत्र न्यायालय ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34 एवं 201 के तहत मृत्युदंड की सजा सुनाई गई थी। उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने 2005 में इस दंडादेश को बहाल रखा था। बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने 11 अप्रैल 2014 को मृत्युदंड को 20 वर्ष के कठोर कारावास में बदल दिया था शासनादेश के अनुसार, धर्मदेव अब तक अपरिहार 21 वर्ष 8 माह 4 दिन, जबकि सपरिहार 24 वर्ष 3 माह 29 दिन की सजा पूरी कर चुका है। इस दौरान जेल में उसका आचरण संतोषजनक पाया गया तथा दया याचिका समिति ने उसकी रिहाई के पक्ष में संस्तुति की। इसी आधार पर राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने अपने विशेषाधिकार का प्रयोग करते हुए उसकी शेष सजा माफ कर दी है। आदेश में यह भी कहा गया है कि यदि बंदी किसी अन्य केस में वांछित न हो तो जिला मजिस्ट्रेट के अनुसार दो जमानतें और उतनी ही धनराशि का एक व्यक्तिगत मुचलका जमा करने पर उसे कारागार से मुक्त किया जाए। सिद्धदोष बंदी धर्मदेव यादव की पत्नी चिंता देवी ने बताया कि पति की रिहाई के लिए शासन से गुहार लगाई थी और प्रार्थना पत्र दिया था।
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शासन के पत्र के संदर्भ में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में प्रोबेशन अधिकारी को निर्देश दिया गया है।-अविनाश कुमार, जिलाधिकारी, गाजीपुर।
1997 में काशी घूमने आई थी डायना-वाराणसी। न्यूजीलैंड की युवती डायना राउटले क्लेयर (25 वर्ष) भारत घूमने आई थी। सात अगस्त 1997 को वह आगरा से वाराणसी पहुंची और भेलूपुर थाना क्षेत्र स्थित ओल्ड विष्णु गेस्ट हाउस के कमरा नंबर 103 में ठहरी थी। गाजीपुर के वृंदावन गांव निवासी धर्मदेव यादव जो कि टूरिस्ट गाइड और एक रिक्शा चालक भी था और डायना से वह काफी घुल मिल गया था। घुमाने के बहाने डायना को लेकर अपने गांव गाजीपुर गया। धर्मदेव यादव ने डायना की हत्या कर शव को अपने घर के कमरे में दफन कर दिया था। धर्मदेव यादव की गिरफ्तारी होने पर उसके निशानदेही पर डायना का कंकाल बरामद हुआ था। हैदराबाद में कंकाल का डीएनए परीक्षण कराया गया। इसमें डायना के कंकाल होने की पुष्टि की गई थी। प्रकरण में जिला जज करुणा शंकर मिश्र ने 25 फरवरी 2003 को धर्मदेव यादव को दोषी करार देते हुए उसे मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। धर्मदेव के सहयोगी काली चरण, सिंधु, रामकरण, केसर प्रसाद, महेश चंद्र मिश्रा को कोर्ट ने दोषमुक्त कर दिया था।
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